देहरादून में फर्जी शस्त्र लाइसेंस गिरोह का भंडाफोड़, आरोपी गिरफ्तार, एसटीएफ ने 01 फर्जी लाइसेंस बरामद किया

देहरादून। उत्तराखण्ड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने फर्जी तरीके से बाहरी राज्यों के शस्त्र लाइसेंस बनवाकर उन्हें उत्तराखण्ड में रजिस्टर्ड कराने वाले गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार कर बड़ी कार्रवाई की है। गिरफ्तार अभियुक्त अमित यादव पुत्र डालचन्द यादव, निवासी फ्लैट नंबर-807, हनुमन्त रेजीडेंसी, शिमला बाईपास, देहरादून है, जिसके कब्जे से एक फर्जी शस्त्र लाइसेंस बरामद किया गया।

एसटीएफ के अनुसार, यह गिरोह बाहरी राज्यों से फर्जी लाइसेंस बनवाकर और फर्जी एनओसी के आधार पर उत्तराखण्ड में उनका पंजीकरण कराकर उन्हें असली के रूप में इस्तेमाल कर रहा था। पुलिस महानिदेशक उत्तराखण्ड दीपम सेठ के निर्देशों और “ऑपरेशन प्रहार” के तहत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ अजय सिंह ने सभी टीमों को संगठित अपराधियों और पेशेवर अपराधियों के संबंध में इनपुट विकसित कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

एसटीएफ को सूचना मिली थी कि बाहरी राज्यों से अपराधी किस्म के लोग फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाकर उत्तराखण्ड में अवैध हथियारों को वैध दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद टीम ने जिलाधिकारी कार्यालय देहरादून, मेरठ और पंजाब आदि स्थानों से पत्राचार कर जानकारी जुटाई। जांच में शस्त्र लाइसेंस नंबर LN34041A7A1AA7/1499 का रिकॉर्ड अमृतसर, पंजाब से स्थानांतरण के बाद वर्ष 2017 में देहरादून की शस्त्र पंजिका में दर्ज होना पाया गया।

गहन जांच के बाद यह सामने आया कि उक्त शस्त्र लाइसेंस अमृतसर, पंजाब से वास्तविक रूप से जारी ही नहीं हुआ था। इसके बाद एसटीएफ ने सुरागरसी-पतारसी कर अमित यादव को शिमला बाईपास रोड, देहरादून से गिरफ्तार कर लिया।

प्रेस नोट के मुताबिक, आरोपी और उसके नेटवर्क द्वारा बाहरी राज्यों से फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाकर उन्हें उत्तराखण्ड में दर्ज कराया जाता था, ताकि अवैध शस्त्रों को बाद में “सही” दस्तावेजों के साथ प्रयोग किया जा सके। पूछताछ में आरोपी ने यह भी संकेत दिए कि इस तरह के फर्जी लाइसेंस कई जनपदों में दर्ज कराए गए हैं और एसटीएफ अब उनसे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाकर आगे कार्रवाई करेगी।

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि बाहरी राज्यों से स्थानांतरित होकर आए शस्त्र लाइसेंस और आपराधिक प्रवृत्ति वाले व्यक्तियों, जिनकी गतिविधियां उत्तराखण्ड में हैं, उन सभी पर एसटीएफ की पैनी नजर है। जांच के दौरान संबंधित शस्त्र लाइसेंस और उससे जुड़े व्यक्तियों के आपराधिक इतिहास की भी पड़ताल की जा रही है।

एसटीएफ ने इसी वर्ष पहले भी फर्जी शस्त्र लाइसेंस के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया था, जिसके पास से एक फर्जी शस्त्र लाइसेंस, एक अवैध सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल .30 बोर और पांच जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे। इससे साफ है कि उत्तराखण्ड में फर्जी लाइसेंस के जरिए अवैध हथियारों को वैध दिखाने की कोशिशों पर लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है।

गिरफ्तार अभियुक्त के पास से एक फर्जी शस्त्र लाइसेंस बरामद हुआ है। कार्रवाई में एसटीएफ टीम में निरीक्षक अबुल कलाम, उप निरीक्षक विद्यादत्त जोशी, हेड कांस्टेबल बिजेन्द्र चौहान, हेड कांस्टेबल देवेन्द्र मंमगाई, हेड कांस्टेबल संजय और आरक्षी मोहन असवाल शामिल रहे।

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