देहरादून: उत्तराखंड के संवेदनशील एविएशन सेक्टर में सुरक्षा मानकों के अनुपालन, पात्रता शर्तों की व्याख्या तथा नियामकीय निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। राज्य का दुर्गम भूगोल और उच्च जोखिम वाले हवाई मार्ग इस विषय को और अधिक गंभीर बनाते हैं, जहां प्रत्येक ऑपरेटर के लिए कड़े सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है।
विवाद का केंद्र उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी (UCADA) द्वारा जारी हेलीकॉप्टर चार्टर ऑपरेटरों के पंजीकरण हेतु निर्धारित दिशा-निर्देश हैं। इन दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी ऑपरेटर के लिए पिछले दो वर्षों का दुर्घटना-मुक्त संचालन रिकॉर्ड एक महत्वपूर्ण पात्रता शर्त है।
उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एक ऑपरेटर इस पात्रता मानदंड के संदर्भ में चर्चा में है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर कंपनी से जुड़ी निम्नलिखित घटनाओं का उल्लेख किया जा रहा है:
02 अक्टूबर 2024: हेलीकॉप्टर VT-EVV से जुड़ी घातक दुर्घटना, जिसमें तीन लोगों की मृत्यु हुई।
21 अगस्त 2019: हेलीकॉप्टर VT-HDX से संबंधित दुर्घटना, जिसमें तीन लोगों की जान गई।
18 अगस्त 2023: चिन्यालीसौड़ में हेलीकॉप्टर VT-HFX की लैंडिंग के दौरान घटना।
इसके अतिरिक्त, वर्ष 2022 में कंपनी के संचालन पर नियामकीय हस्तक्षेप के तहत अस्थायी निलंबन की कार्रवाई की जानकारी भी सामने आई थी।
वर्ष 2025 में केदारनाथ सेक्टर में संचालित एक उड़ान को लेकर आरोप लगाए गए कि एक हेलीकॉप्टर ने बिना पूर्व अनुमति संचालन किया, जिसके बाद सेवाओं पर अस्थायी रोक लगाई गई।
मामले को और गंभीर बनाते हुए, कंपनी के निदेशक का नाम पूर्व में एक आपराधिक मामले में भी सामने आ चुका है।
वर्ष 2018 के कथित हेलीकॉप्टर टिकटिंग फ्रॉड मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
रुद्रप्रयाग की जिला अदालत द्वारा पहले उनकी जमानत याचिका खारिज की गई थी, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
बाद में सत्र न्यायालय ने उन्हें जमानत प्रदान की, साथ ही दो जमानतदार और व्यक्तिगत बांड जमा करने का निर्देश दिया।
सूत्रों के अनुसार उपरोक्त रिकॉर्ड के बावजूद चार्टर संचालन में भागीदारी हेतु पात्रता शर्तों में ढील या पुनर्व्याख्या के प्रयास किए जा रहे हैं।
हाल के समय में संबंधित ऑपरेटर का नाम कथित रूप से कुछ बाहरी व्यावसायिक हितों, विशेषकर रियल एस्टेट/बिल्डर लॉबी, से भी जोड़ा जा रहा है ।
एविएशन और विधि विशेषज्ञों के अनुसार
उत्तराखंड जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता गंभीर परिणाम ला सकता है।
यदि पात्रता शर्तों में ढील दी जाती है, तो भविष्य में किसी दुर्घटना की स्थिति में नियामक संस्थाओं की जवाबदेही भी तय हो सकती है। नियमों का समान और निष्पक्ष अनुपालन ही एविएशन सुरक्षा का मूल आधार है।
फिलहाल, इस पूरे मामले पर UCADA या संबंधित ऑपरेटर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। तथापि, उठते सवालों के मद्देनज़र यह मामला एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करता है, ताकि तथ्यों की पुष्टि हो सके और एविएशन सुरक्षा मानकों पर जनविश्वास बना रहे।


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