देहरादून/सितारगंज । देवभूमि उत्तराखण्ड को अपराधमुक्त बनाए रखने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियान ऑपरेशन प्रहार के तहत उत्तराखण्ड एसटीएफ और सितारगंज पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए हत्या के प्रयास और लूट की सनसनीखेज वारदात में फरार चल रहे 25 हजार रुपये के इनामी बदमाश को मथुरा रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया। पकड़ा गया आरोपी चेतन सिंह बिष्ट उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों में नाम और पहचान बदलकर छिपता फिर रहा था तथा पुलिस से बचते हुए लगातार फरारी काट रहा था। बताया जा रहा है कि वह एक बार फिर भागने की फिराक में था, लेकिन एसटीएफ के तकनीकी इनपुट और सटीक सूचना के आधार पर उसे देर रात दबोच लिया गया।
पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री के अपराधमुक्त उत्तराखण्ड के संकल्प और पुलिस महानिदेशक उत्तराखण्ड दीपम सेठ के निर्देशों के क्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ अजय सिंह ने सभी एसटीएफ इकाइयों को संगठित गिरोहों, गैंगस्टरों, पेशेवर अपराधियों और असामाजिक तत्वों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में एसटीएफ की कुमाऊं टीम ने कोतवाली सितारगंज पुलिस के साथ मिलकर यह बड़ी सफलता हासिल की। गिरफ्तार आरोपी की पहचान चेतन सिंह बिष्ट पुत्र नर सिंह बिष्ट निवासी चांदनी चौक, घुड़दौड़ा, कालीनगर, हल्द्वानी, जनपद नैनीताल, उम्र 34 वर्ष के रूप में हुई है।
जांच में सामने आया है कि फरवरी 2025 में चेतन सिंह बिष्ट ने अपने साथियों के साथ मिलकर कोतवाली सितारगंज क्षेत्र में एक परचून की दुकान पर लूट की वारदात को अंजाम दिया था। आरोप है कि बदमाशों ने दुकान के गल्ले से नकदी और तीन मोबाइल फोन लूट लिए थे। जब दुकानदार ने विरोध किया तो आरोपियों ने उस पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर मरणासन्न अवस्था में पहुंच गया। इस मामले में पुलिस पूर्व में दो अभियुक्तों को गिरफ्तार कर चुकी थी, लेकिन चेतन बिष्ट तभी से फरार चल रहा था। फरारी के दौरान वह उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर छिपकर रह रहा था और अन्य आपराधिक घटनाओं को भी अंजाम दे रहा था।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार चेतन सिंह बिष्ट के विरुद्ध जनपद नैनीताल में भी चोरी और लूट के मुकदमे पहले से दर्ज हैं। एसटीएफ का मानना है कि आरोपी एक शातिर और पेशेवर अपराधी है, जो लगातार अपनी पहचान छिपाकर कानून से बचने की कोशिश कर रहा था। उसकी गिरफ्तारी को एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि वह लंबे समय से पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था।
इस कार्रवाई में उत्तराखण्ड एसटीएफ की ओर से निरीक्षक विकास चौधरी, उपनिरीक्षक विपिन चंद्र जोशी, उपनिरीक्षक कृष्ण गोपाल मठपाल, मुख्य आरक्षी महेंद्र गिरी, मुख्य आरक्षी किशोर कुमार, कांस्टेबल जितेंद्र कुमार और टेक्निकल हैंड किशन चंद्र शर्मा शामिल रहे। वहीं कोतवाली सितारगंज टीम से वरिष्ठ उपनिरीक्षक राजेंद्र मुनियाल और कांस्टेबल विनोद जोशी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी और फरार व इनामी बदमाशों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

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