
देहरादून। जनपद में दिव्यांगजनों, वृद्धजनों और बेसहारा महिलाओं-बच्चों के लिए जिला प्रशासन ने एक संवेदनशील और सराहनीय पहल करते हुए निःशुल्क ईवी वाहन सेवा शुरू की है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने शनिवार को जिला दिव्यांगजन पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी) और केदारपुरम स्थित राजकीय नारी निकेतन के लिए अलग-अलग ईवी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर सेवा का शुभारंभ किया।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि दिव्यांग और वृद्धजनों का जीवन सरल बनाना तथा उन्हें आवश्यक सुविधाएं सहज रूप से उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से सितंबर 2025 में गांधी शताब्दी जिला चिकित्सालय में राज्य का पहला जिला दिव्यांगजन पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी) स्थापित किया गया था, जहां फिजियोथेरेपी, मनोवैज्ञानिक परामर्श, दिव्यांग प्रमाण पत्र और कृत्रिम अंग वितरण सहित विभिन्न सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि डीडीआरसी से जुड़े दिव्यांग और वृद्धजनों को अक्सर राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांग संस्थान (एनआईबीएच), समाज कल्याण विभाग और अन्य अस्पतालों में आवागमन के दौरान परिवहन संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इस समस्या के समाधान के लिए समर्पित निःशुल्क ईवी वाहन सेवा शुरू की गई है, जिससे उनकी आवाजाही अब आसान हो सकेगी।

वहीं केदारपुरम स्थित राजकीय नारी निकेतन, बालिका निकेतन, बाल गृह और शिशु सदन में 180 से अधिक महिलाएं, बालिकाएं और बच्चे निवासरत हैं। ये सभी बेसहारा, परित्यक्त और विशेष देखभाल की आवश्यकता वाले हैं। इन्हें समय-समय पर चिकित्सा उपचार और अन्य कार्यों के लिए अस्पताल ले जाना पड़ता है। ईवी वाहन सेवा शुरू होने से अब इन संस्थानों में रहने वालों को सुरक्षित, सुगम और सम्मानजनक परिवहन सुविधा मिल सकेगी।
डीएम ने कहा कि यह पहल केवल सुविधा प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। ईवी वाहनों के उपयोग से प्रदूषण नियंत्रण को बढ़ावा मिलेगा और जरूरतमंद वर्ग को सुरक्षित परिवहन उपलब्ध होगा।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेन्द्र कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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