
अभाविप का उद्यमियों से आवाह्न: युवा शक्ति और शिक्षण संस्थानों के साथ अनुसंधान में करें निवेश
उद्यमियों और युवा शक्ति की साझेदारी से भारत बनेगा वैश्विक नवाचार का केंद्र: डॉ वीरेंद्र सिंह सोलंकी
भुवनेश्वर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की चल रही राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक में आज शिक्षा, वैश्विक परिदृश्य, भारतीय अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र तथा राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चिंतन-मंथन किया गया।
देशभर के विभिन्न प्रांतों से आए कार्यकर्ता-प्रतिनिधियों ने इस बैठक में अपने सुझाव प्रस्तुत कर शिक्षा,अर्बन माओवाद, महिला सुरक्षा तथा वैश्विक परिदृश्य से संबंधित विचारार्थ प्रस्तावों पर अपने सुझाव व्यक्त किए है। गहन चिंतन-मंथन के उपरांत कल विचारार्थ चारों प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित किया जाएगा। आज की बैठक में अभाविप ने भारतीय उद्योग जगत से अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया है, जिससे विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने की दिशा में गति प्राप्त होगी।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने भारतीय उद्यमियों से भारतीय अनुसंधान में निवेश बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि, “विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने हेतु अनुसंधान संबंधी अवसंरचना एवं अनुसंधान परिवेश का सुदृढ़ीकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत के विकास तथा उसे वैश्विक पटल पर अग्रणी बनाने के लिए सरकारी संस्थानों के साथ उद्योग जगत का समन्वित योगदान आवश्यक है। भारत में अनुसंधान एवं विकास पर सकल घरेलू उत्पाद का एक प्रतिशत से भी कम व्यय किया जाता है, जिसमें लगभग 60 प्रतिशत से भी योगदान इसरो, डीआरडीओ, प्रमुख शैक्षिक संस्थानों तथा विश्वविद्यालयों जैसे सरकारी तंत्र का है।

आज भारतीय उद्यमियों के लिए प्रत्येक क्षेत्र में संभावनाएँ बढ़ रही हैं और वे भारत की बढ़ती वैश्विक शक्ति के साथ अधिक सशक्त हो आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में आवश्यकता है कि उद्योग जगत भी इन संस्थानों के साथ दीर्घकालिक सहयोग स्थापित करते हुए अनुसंधान एवं विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, जैव प्रौद्योगिकी, स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा तथा अन्य उभरते क्षेत्रों में निवेश बढ़ाए, जिससे अनुसंधान एवं विकास पर होने वाले व्यय के दर में भी बढ़ोत्तरी होगी।
अभाविप का मानना है कि शिक्षा केवल डिग्री या रोजगार प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और ज्ञान सृजन का भी आधार है। इसी व्यापक दृष्टि के साथ अभाविप ने सदैव शिक्षण संस्थानों में अनुसंधान, नवाचार तथा वैज्ञानिक चिंतन को प्रोत्साहित करने पर बल दिया है। उद्योग जगत के संसाधनों और शैक्षिक संस्थानों की क्षमता का समन्वय आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को नई गति प्रदान करेगा। अनुसंधान में बढ़ा हुआ निवेश केवल आर्थिक प्रगति का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक नेतृत्व को सुदृढ़ करने का आधार भी बनेगा।”

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