
चिन्हीकरण और लंबित नियुक्ति प्रक्रियाएं पूरी करने की मांग, नए जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
देहरादून। उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक धीरेंद्र प्रताप तथा उत्तराखंड आंदोलनकारी मंच के अध्यक्ष जगमोहन नेगी के नेतृत्व में आंदोलनकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को नवनियुक्त जिलाधिकारी आदेश चौहान से मिला और राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण तथा लंबित नियुक्ति प्रक्रियाओं को तत्काल पूरा किए जाने की मांग उठाई।
प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को पुष्पगुच्छ एवं शॉल भेंट कर स्वागत किया। आंदोलनकारियों ने बताया कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत आज जिलाधिकारी कार्यालय के घेराव की तैयारी थी, लेकिन जिले में नए जिलाधिकारी की नियुक्ति होने के कारण आंदोलनकारियों ने अपना विरोध कार्यक्रम फिलहाल स्थगित कर संवाद का रास्ता चुना।
बैठक के दौरान आंदोलनकारियों ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि राज्य आंदोलनकारी चिन्हीकरण की प्रक्रिया पिछले छह माह से लंबित पड़ी है और अब तक एक भी पात्र आंदोलनकारी को चिन्हित नहीं किया गया है। इसके अलावा जिन आंदोलनकारियों की नियुक्ति संबंधी प्रक्रियाएं प्रगति पर थीं, वे भी अधूरी रह गई हैं, जिससे आंदोलनकारियों में भारी नाराजगी है।
जिलाधिकारी आदेश चौहान ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि लंबित नियुक्ति प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलनकारी चिन्हीकरण के लिए शासन द्वारा निर्धारित छह माह की अवधि समाप्त हो चुकी है। इस संबंध में आंदोलनकारियों द्वारा दिए गए ज्ञापन पर कार्रवाई करते हुए अवधि को आगे बढ़ाने के लिए शासन एवं मुख्यमंत्री स्तर पर प्रस्ताव भेजा जाएगा।
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि राज्य निर्माण आंदोलनकारियों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री द्वारा छह माह के भीतर चिन्हीकरण प्रक्रिया पूरी कराने का दिया गया आश्वासन अब तक धरातल पर नहीं उतर पाया है। उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में मुट्ठीभर आंदोलनकारी भी चिन्हित नहीं किए जा सके हैं, जो सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

धीरेंद्र प्रताप और जगमोहन नेगी ने चेतावनी दी कि यदि आगामी 15 दिनों के भीतर चिन्हीकरण और नियुक्ति संबंधी प्रक्रियाओं में ठोस प्रगति नहीं हुई तो जून के तीसरे सप्ताह में राज्यभर के आंदोलनकारी एकजुट होकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए बाध्य होंगे।
आंदोलनकारियों ने कहा कि जिन लोगों ने लंबे संघर्ष और बलिदान देकर उत्तराखंड राज्य के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया, आज वही आंदोलनकारी अपने अधिकारों के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताते हुए सरकार के रवैये पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिला एवं वरिष्ठ आंदोलनकारी भी मौजूद रहे। प्रमुख रूप से सत्या पोखरियाल, महेश जोशी, सुलोचना भट्ट, ललित भदरी सहित कई आंदोलनकारियों ने सभा को संबोधित करते हुए सरकार की कार्यशैली की तीखी आलोचना की और आंदोलनकारियों के सम्मान तथा अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया।

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