
मौसम की मार से ‘परिवर्तन शंखनाद’ फीका, भारी बारिश ने बिखेरे कार्यक्रम के इरादे
अल्मोड़ा। कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी का अल्मोड़ा दौरा प्रकृति की बेरुखी का शिकार हो गया। मूसलाधार बारिश और खराब मौसम ने उनकी जनसभा की रूपरेखा ही बदल कर रख दी। दूर-दराज से उमड़े समर्थक मायूसी लिए घर लौटे, जबकि पार्टी को कुमाऊं में राजनीतिक दस्तक का भरोसा था।
राहुल गांधी को ‘परिवर्तन का शंखनाद’ कार्यक्रम में अल्मोड़ा में सीधे संवाद करना था, लेकिन आसमान से बरसते पानी ने सारे गणित बिगाड़ दिए। करीब साढ़े बारह बजे उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा ने मंच से ऐलान किया – राहुल गांधी अल्मोड़ा नहीं आ पाएंगे। इसके बाद उन्होंने पंतनगर से वर्चुअल माध्यम से लोगों को संबोधित किया।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में राहुल ने कार्यकर्ताओं से कहा – संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करो, जनता के हर मुद्दे पर मुखर होओ। उन्होंने बढ़ती महंगाई, ईंधन के चढ़ते दामों और भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की वारदातों पर केंद्र सरकार को घेरा। कहा, “युवाओं का हौसला तोड़ा जा रहा है। उत्तराखंड में भ्रष्टाचार मुक्त शासन के लिए राजनीतिक बदलाव जरूरी है।”
राहुल ने अल्मोड़ा की जनता का आभार जताया और कहा कि मौसम की खराबी के चलते नहीं आ सका। उन्होंने शीघ्र अल्मोड़ा आकर सीधा संवाद करने का वादा किया।
गौरतलब है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कुमाऊं में दमखम दिखाने की इस रणनीति में कांग्रेस को वैसा जनसमर्थन नहीं मिल पाया, जैसी उम्मीद थी। कार्यकर्ताओं का उत्साह बारिश में भीग गया और राहुल के न आने से माहौल पस्त हो गया। हालांकि कार्यक्रम औपचारिक रूप से जारी रहा, लेकिन प्रत्यक्ष रूप से राहुल को देखने और सुनने की चाह में पहुंचे हज़ारों समर्थक धीरे-धीरे खाली हाथ लौटने लगे।
इससे पहले जनसभा को कुमारी शैलजा, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी, विधायक मनोज तिवारी, हरीश धामी, सुमित हृदयेश, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा, राजकुमार ठुकराल, प्रकाश जोशी, मदन सिंह बिष्ट, रंजीत रावत, आदेश चौहान, जिला अध्यक्ष भूपेंद्र भोज सहित अन्य पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने संबोधित किया।

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