बच्चों के विरुद्ध बढ़ती हिंसा एवं अपराध की घटनाएं अत्यंत चिंताजनक : डॉ. गीता खन्ना

देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने हाल ही में प्रदेश के विभिन्न जनपदों में बच्चों एवं किशोरों से संबंधित गंभीर घटनाओं का संज्ञान लिया है। विकासनगर क्षेत्र में 12 वर्षीय बालक के साथ मारपीट कर उसका हाथ तोड़ने, हरिद्वार में अपहृत मासूम बालिका की बरामदगी तथा टिहरी जनपद में प्रेम संबंध के कारण नाबालिग युवती से मिलने पहुंचे एक दलित युवक की कथित रूप से पीट-पीटकर हत्या किए जाने की घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए आयोग ने संबंधित मामलों में की गई कार्यवाही की विस्तृत आख्या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों से तलब की है।

डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि एक ओर बच्चे एवं किशोर हिंसा, उत्पीड़न और अपराध का शिकार हो रहे हैं तथा दूसरी ओर सामाजिक पूर्वाग्रह, असहिष्णुता एवं कानून को हाथ में लेने की प्रवृत्ति समाज के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं न केवल कानून व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं, बल्कि समाज के नैतिक एवं मानवीय मूल्यों के क्षरण की ओर भी संकेत करती हैं।

यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है तथा समाज को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है।”

आयोग अध्यक्ष ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में बच्चों एवं किशोरों के साथ हिंसा, मारपीट, उत्पीड़न अथवा उनके अधिकारों का हनन स्वीकार्य नहीं है। आयोग द्वारा विकासनगर, हरिद्वार एवं टिहरी की घटनाओं सहित ऐसे सभी मामलों में पुलिस एवं संबंधित विभागों द्वारा की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई है।

डॉ. खन्ना ने कहा कि बच्चों एवं किशोरों के विरुद्ध बढ़ती हिंसा, गुमशुदगी, अपहरण, सामाजिक उत्पीड़न तथा कानून-व्यवस्था से जुड़े विषयों पर व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श एवं प्रभावी रणनीति तैयार किए जाने हेतु दिनांक 18 जून 2026 को उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग में एक महत्वपूर्ण बैठक आहूत की गई है। उक्त बैठक में पुलिस विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग, श्रम विभाग, समाज कल्याण विभाग, बाल संरक्षण तंत्र तथा अन्य संबंधित हितधारकों के साथ इन विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा तथा बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

आयोग अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि बच्चों एवं किशोरों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित किए जाने हेतु आयोग सतत निगरानी करेगा।

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