
देहरादून/ऊधमसिंहनगर । उत्तराखण्ड में फर्जी शस्त्र लाइसेंस और अवैध हथियारों के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए चलाए जा रहे अभियान में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। देर रात की ताबड़तोड़ कार्रवाई में STF ने सितारगंज-रुद्रपुर क्षेत्र से दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से दो पिस्टल और 31 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं।
मुख्यमंत्री के “अपराध मुक्त उत्तराखण्ड” विजन और पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के निर्देशन में STF द्वारा बाहरी राज्यों से स्थानांतरित शस्त्र लाइसेंसों की वैधता की गहन जांच की जा रही है। इसी क्रम में 4 जून 2026 को काशीपुर कोतवाली में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसकी विवेचना के दौरान यह कार्रवाई की गई।
STF टीम ने 12 जून की देर रात सितारगंज और रुद्रपुर क्षेत्र में दबिश देकर करनजीत सिंह (35 वर्ष), निवासी बरेली (उ.प्र.), जो वर्तमान में सितारगंज में रेस्टोरेंट संचालक है, तथा विक्रमजीत सिंह तूर (36 वर्ष), निवासी सितारगंज को गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान इनके पास से एक .30 बोर और एक .32 बोर की सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल तथा 31 जिंदा कारतूस बरामद हुए।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक STF ने बताया कि वर्ष 2026 की शुरुआत से ही फर्जी शस्त्र लाइसेंस और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए अवैध लाइसेंस तैयार करने वाले गिरोहों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। पिछले एक माह से STF की टीमें इस नेटवर्क की परत-दर-परत जांच में जुटी थीं और साक्ष्यों के आधार पर लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि फर्जी शस्त्र लाइसेंस और अवैध हथियारों का यह नेटवर्क राज्य की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। जांच में जो भी व्यक्ति, दलाल या सहयोगी संलिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
STF की अब तक की कार्रवाई में राज्य के विभिन्न जनपदों में तीन मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। साथ ही 14 अवैध शस्त्र, 341 कारतूस और बड़ी संख्या में फर्जी एवं संदिग्ध शस्त्र लाइसेंस बरामद किए गए हैं। STF लगातार इस नेटवर्क पर शिकंजा कस रही है और आने वाले समय में और बड़े खुलासे की संभावना जताई जा रही है।
STF ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी को फर्जी या संदिग्ध शस्त्र लाइसेंस के संबंध में कोई जानकारी मिले तो तुरंत सूचना दें। सूचनाकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली टीम में निरीक्षक अरुण कुमार, निरीक्षक एम.पी. सिंह, उपनिरीक्षक जगदीप नेगी, उपनिरीक्षक प्रकाश भगत, अपर उपनिरीक्षक सत्येन्द्र गंगोला सहित कई पुलिसकर्मी शामिल रहे।

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