
वक्ताओं ने कहा- हत्यारों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में सजा दिलाई जाए, बुलडोजर एक्शन पर उठाए सवाल; आंदोलन की चेतावनी
देहरादून। आज प्रातः 10:30 बजे गांधी पार्क के मुख्य गेट पर राजनीतिक दलों, जनसंगठनों व सामाजिक संस्थाओं ने बैरागी वाला विकास नगर में हुई विनोद कश्यप की हत्या के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान वक्ताओं ने हत्या को लेकर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की, वहीं सरकार पर चुनिंदा न्याय और सांप्रदायिक रंग देने के गंभीर आरोप लगाए।
प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में कहा कि हत्या के आरोपियों और उनके सहयोगियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए और इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो। वक्ताओं ने हत्या के बाद हुई ‘सत्ता प्रायोजित’ हिंसा पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि यह दो पक्षों का वर्षों पुराना व्यक्तिगत रंजिश का मामला है, लेकिन बाहरी तत्वों द्वारा इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई।
वक्ताओं ने पुलिस निगरानी में हुई आगजनी, लूटपाट और बुलडोजर से घर गिराए जाने पर सरकार की निंदा की। उन्होंने कहा, “यदि न्याय बुलडोजर, आगजनी और गुंडागर्दी से करना है तो यह हर मामले में बराबर होना चाहिए।” उन्होंने अंकिता भंडारी और केतन (दलित परिवार के युवक) की निर्मम हत्या के मामलों में आरोपियों के घर बुलडोजर न चलाने पर सरकार पर निशाना साधा। कहा गया कि एक संप्रदाय को निशाना बनाकर पूरे समाज को सजा देना आतंक फैलाना है, जो कि एक अपराध है।
सरकार के मुखिया द्वारा दिए गए सांप्रदायिक और भड़काऊ भाषणों पर चिंता जताते हुए वक्ताओं ने कहा कि इससे समाज में दरार पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि इस मसले पर गंभीर मंथन की आवश्यकता है, अन्यथा उत्तराखंड में एक मजबूत आंदोलन खड़ा होगा और सरकार का जबरदस्त विरोध किया जाएगा।
इस अवसर पर कांग्रेस से संजय शर्मा (पूर्व सदस्य, उत्तराखंड लोक सेवा आयोग), सुजाता पॉल (प्रदेश प्रवक्ता), याकूब सिद्दीकी, शिवानी थपलियाल, मुखेश शर्मा, मोहन खत्री; भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से समर भंडारी; सीपीएम से राजेंद्र पुरोहित (प्रदेश सचिव), शिवप्रसाद देवली; माले से इंद्रेश मैंखरी (प्रदेश सचिव) शामिल रहे।
जनसंगठनों की ओर से कमला पंत (उत्तराखंड महिला मंच), विमल कोहली, हरवीर सिंह कुशवाहा (सर्वोदय मंडल), त्रिलोचन भट्ट, हरिओम पाली, शंकर गोपाल (चेतना आंदोलन), पूर्व पार्षद लता फैतहुसैन, भोपाल (क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन), कुलदीप (मजदूर संघर्ष संगठन) व अन्य पदाधिकारी व देहरादून के बड़ी संख्या में संवेदनशील नागरिक मौजूद रहे।

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