
नई योजना में राज्यों पर 40% वित्तीय बोझ, मजदूरी बढ़ाने से भी इनकार — कांग्रेस नेता ने खड़े किए कई तीखे सवाल
देहरादून। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने केंद्र की भाजपा सरकार पर मनरेगा को खत्म कर ग्रामीण मजदूरों का ‘काम का अधिकार’ छीनने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि एक ओर केंद्र सरकार ने मनरेगा समाप्त कर दी, वहीं दूसरी ओर लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 तक 34 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों का ₹17,144.13 करोड़ का बकाया अभी तक नहीं चुकाया गया, जिसमें अकेले मजदूरी देनदारी ₹7,846.25 करोड़ है।
आर्य ने सवाल उठाया कि जब मजदूरों को उनके परिश्रम का पैसा ही नहीं मिला, तो केंद्र सरकार 1 जुलाई से नई योजना VB-G RAM G राज्यों पर क्यों थोप रही है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस द्वारा लाई गई मनरेगा में मजदूरी का 100% खर्च केंद्र वहन करता था, लेकिन नई योजना में राज्यों पर कुल खर्च का 40% बोझ डाल दिया गया है। कर्नाटक के ₹700 करोड़ और झारखंड के ₹900 करोड़ समेत तमिलनाडु व तेलंगाना जैसे राज्यों को भी बकाया राशि नहीं मिली है।
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि जब भाजपा शासित मध्य प्रदेश और बिहार तक फंडिंग पैटर्न पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं, तो केंद्र सरकार की जिद समझ से परे है। मध्य प्रदेश पर ₹20,037 करोड़ और बिहार पर ₹15,939 करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ रहा है। उन्होंने खरीफ सीजन में 60 दिनों तक काम बंद रखने के ‘ब्लैकआउट’ प्रावधान को किसान और मजदूर विरोधी बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।
आर्य ने मजदूरी दरों पर भी केंद्र को घेरा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले दिन से ₹400 प्रतिदिन मजदूरी की मांग करती रही है, जबकि बिहार ₹255 से ₹413 और जम्मू-कश्मीर ₹272 से ₹311 करने की गुहार लगा रहे हैं, फिर भी केंद्र सरकार मजदूरों को सम्मानजनक मजदूरी देने को तैयार नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस जून 42% कम बारिश और 22.7% कम खरीफ बुआई के बीच 300 से अधिक जिले सूखे की चपेट में आ सकते हैं। ऐसे संकट के समय मनरेगा को खत्म करना मजदूरों, SC, ST, OBC और गरीबों पर सीधा हमला है।

Recent Comments