

बाल श्रम कराने वालों पर गिरेगी गाज, 2 साल तक जेल का प्रावधान
देहरादून,।जनपद देहरादून में बाल श्रम उन्मूलन को लेकर जिला प्रशासन ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। जिला टास्क फोर्स की बैठक में पिछले एक साल के आंकड़ों की समीक्षा की गई, जिसमें प्रशासन की सख्ती साफ नजर आई।
सहायक श्रम आयुक्त शैलेष सती की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि 01 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक जिले में कुल 486 औचक निरीक्षण और छापेमारी की गई। इस दौरान विभिन्न प्रतिष्ठानों से 28 बाल श्रमिकों और 12 किशोर श्रमिकों सहित कुल 40 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू कराया गया। मुक्त कराए गए सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति को सौंप दिया गया है। प्रशासन अब इनके पुनर्वास और शिक्षा की व्यवस्था कर रहा है ताकि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
बैठक में यह भी बताया गया कि माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में दोषी नियोक्ताओं से 20-20 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति वसूली गई है। 12 मामलों में आयु प्रमाण पत्र के आधार पर श्रमिक बाल श्रम की श्रेणी से बाहर पाए गए, इसलिए उन पर वसूली नहीं की गई। 05 मामलों में नए आदेश जारी किए गए हैं और 02 मामलों में जुर्माना वसूली के लिए जिला मजिस्ट्रेट को पत्र भेजा गया है। शेष 08 मामलों में कानूनी कार्रवाई जारी है।
सहायक श्रम आयुक्त ने बताया कि बाल श्रम प्रतिषेध एवं विनियमन अधिनियम 1986 के संशोधन के अनुसार 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी प्रकार का काम कराना अपराध है। दोषी पाए जाने पर 6 महीने से 2 साल तक की जेल और न्यूनतम 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
उन्होंने पुलिस, श्रम विभाग और अन्य विभागों को संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 का व्यापक प्रचार करने के निर्देश दिए।
बैठक में जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, रीजनल लेबर कमिश्नर दिनेश कुमार, सीएचएल समन्वयक साक्षी भंडारी, आसरा ट्रस्ट से अक्षित नौटियाल सहित जिला टास्क फोर्स और बाल कल्याण समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

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