हरेला पर CM धामी का बड़ा ऐलान, 1 दिन में 12 लाख पौधे, 2 करोड़ का लक्ष्य 

समापन पर जैस्मिन सैंडलस करेंगी प्रस्तुति, लोक संवर्धन पर्व 2 दिन और बढ़ा 

देहरादून।  उत्तराखंड की संस्कृति, पर्यावरण और शिल्प को समर्पित 6वें लोक संवर्धन पर्व के छठे दिन परेड ग्राउंड में हरेला पर्व का विशेष आयोजन हुआ। भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय तथा उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विकास निगम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास और देहरादून महापौर सौरभ थपलियाल भी मौजूद रहे।

हरेला पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री सहित सभी अतिथियों ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत वृक्षारोपण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेला सिर्फ एक त्योहार नहीं है, बल्कि प्रकृति, कृषि और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा उत्तराखंड का सबसे बड़ा लोकपर्व है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे इस पर्व पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी देखभाल करें।

सभा को संबोधित करते हुए सीएम धामी ने कहा, “आज यह देखकर खुशी हो रही है कि लोक संवर्धन पर्व हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्पकारों और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को एक मंच पर लेकर आया है। जनता के उत्साह को देखते हुए इस पर्व को 2 दिन और बढ़ाया गया है।” उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने हरेला पर 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन आज ही 12 लाख से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। ‘दो करोड़ पौधे’ लगाने के संकल्प के तहत अब तक 1.15 करोड़ से अधिक पौधारोपण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के विकास के दो आधार पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था हैं। इसलिए पर्यावरण बचाने के साथ-साथ पहाड़ की आजीविका को भी मजबूत करना होगा।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोकगायक और गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी को राज्य की लोकसंगीत परंपरा को जीवित रखने में उनके अतुलनीय योगदान के लिए सम्मानित किया।

सायंकालीन सांस्कृतिक संध्या में हजारों की संख्या में लोग जुटे। कार्यक्रम की शुरुआत गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी की प्रस्तुति से हुई। उन्होंने ‘नौछमी नरैणा’, ‘ठंडो रे ठंडो’, ‘मेरी गैल्याणी’ जैसे अपने सदाबहार गीतों से पूरे पंडाल को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद लोकप्रिय लोकगायक किशन महिपाल ने ‘फ्योंलड़िया’, ‘स्याली बिचलिया’, ‘मेरी बामणी’ गाकर माहौल को और रंगीन बना दिया। उनकी प्रस्तुति पर युवा भी पारंपरिक धुनों पर थिरकते नजर आए।

दिनभर चली प्रदर्शनी में देश के विभिन्न राज्यों से आए 150 से अधिक शिल्पकारों, बुनकरों और स्वयं सहायता समूहों के स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहे। यहां हस्तशिल्प, हथकरघा, ऊनी वस्त्र, लकड़ी के उत्पाद और पहाड़ी व्यंजनों की भरमार थी। मास्टर शिल्पकारों ने लाइव डेमो देकर आगंतुकों को अपनी कला से रूबरू कराया। इससे कारीगरों को अपने उत्पाद बेचने और बाजार से जुड़ने का बड़ा मंच मिला।

अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास ने कहा कि हरेला पर्व प्रकृति और मानव के रिश्ते का प्रतीक है। उन्होंने भी सभी से एक-एक पौधा लगाने की अपील की।

लोक संवर्धन पर्व का भव्य समापन 17 जुलाई को होगा। समापन संध्या में पंजाबी गायिका जैस्मिन सैंडलस अपनी हिट प्रस्तुतियां देंगी। उनके गीत ‘धुरंधर-टाइटल ट्रैक’, ‘जाइये सजना’, ‘वारी जावां’ पर दर्शक झूमते नजर आएंगे। अंतिम दिन भी हस्तशिल्प प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम जारी रहेंगे।

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