

राहुल गांधी बोले- 10 साल में 152 पेपर लीक ने बर्बाद किया करोड़ों का भविष्य, पेपर लीक नहीं, युवाओं के सपनों की चोरी है।
बारिश-कीचड़ के बीच घंटों डटे रहे हजारों युवा, ‘रोजगार हमारा अधिकार है’ के नारों से गूंजा बन्नू स्कूल मैदान
देहरादून। राजधानी देहरादून में “छात्रों की गूंज” महारैली शुक्रवार को युवाओं के आक्रोश और उम्मीदों का बड़ा मंच बन गई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बन्नू स्कूल परिसर पहुंचने से पहले ही मैदान नारों से गूंजने लगा था। शाम को हुई भारी बारिश ने कार्यक्रम स्थल पर जगह-जगह कीचड़ फैला दिया, फिर भी बुजुर्गों, बच्चों संग पहुंचीं माताओं और युवाओं का हुजूम करीब चार-पांच घंटे तक मैदान में डटा रहा। डीजे की धुन पर थिरकते युवाओं और तख्तियां-बैनर थामे प्रतियोगी परीक्षार्थियों ने “पेपर लीक बंद करो”, “युवा जागा है, देश बदलेगा” और “नौकरी नहीं तो जवाब दो” जैसे नारों से माहौल गरमाए रखा। रात करीब 8 बजे राहुल गांधी के मंच पर पहुंचते ही उत्साह चरम पर पहुंच गया, जबकि रेसकोर्स इलाके में देर रात तक भारी जाम की स्थिति बनी रही।
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक महज परीक्षा प्रणाली की चूक नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों की सुनियोजित चोरी है। उन्होंने आंकड़े रखते हुए बताया कि पिछले दस वर्षों में देश भर में 152 पेपर लीक सामने आए, जिनसे करीब साढ़े सात करोड़ छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि कोचिंग सेंटरों से लेकर मंत्रालयों तक फैला एक संगठित माफिया लीक प्रश्न-पत्रों का “रेट कार्ड” तक चलाता है, लेकिन इससे जुड़े बड़े दोषियों को आज तक सजा नहीं मिली।

एक औसत छात्र की तैयारी पर करीब 9 लाख रुपये खर्च होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि परिवार जीवनभर की जमापूंजी लगाकर बच्चों को पढ़ाते हैं, लेकिन बेईमानी का पैसा रखने वाला महज 1 प्रतिशत तबका पेपर लीक के “चोर दरवाजे” से आगे निकल जाता है — जो बाकी 99 प्रतिशत ईमानदार छात्रों के हक पर सीधा डाका है।
बेरोजगारी के मुद्दे पर राहुल गांधी ने कहा कि आज देश में रोजगार के चार बड़े दरवाजे लगभग बंद हो चुके हैं — आयात पर निर्भरता के चलते ठप पड़ा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, बैंकों से आम युवाओं को कर्ज न मिलने से बंद होते उद्यमिता के रास्ते, कॉर्पोरेट-आईटी नौकरियों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मार, और सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण से सिकुड़ता सरकारी नौकरियों का दायरा। इन्हीं वजहों से देश के करीब 9 करोड़ युवा सरकारी नौकरी की तैयारी में जुटे हैं, जबकि सफलता महज 6 लाख यानी हर 150 में से 1 अभ्यर्थी को ही मिल पाती है।

रैली का सबसे भावुक क्षण तब आया जब पेपर लीक के सदमे में आत्महत्या करने वाली छात्रा रिया थापा के पिता मंच पर पहुंचे और बेटी के संघर्ष तथा परिवार पर बीती पीड़ा साझा की। मंच पर पेपर लीक से प्रभावित अन्य छात्रों के साथ चर्चित गणित शिक्षक अभिनय सर भी मौजूद रहे, जिन्होंने भी युवाओं के मुद्दों पर अपनी बात रखी।
सुधार के सुझाव देते हुए राहुल गांधी ने सभी राजनीतिक दलों से पेपर लीक रोकने के लिए राष्ट्रीय सहमति बनाने की अपील की। उन्होंने सुरक्षित प्रश्न बैंक, रैंडम प्रश्न-पत्र प्रणाली और लचीली परीक्षा तिथियों जैसी छात्र-केंद्रित व्यवस्था लागू करने पर जोर दिया। साथ ही परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखने, शिक्षा के निजीकरण पर रोक लगाने, दोषियों को कठोरतम सजा देने और प्रभावित छात्रों के लिए तुरंत पुन: परीक्षा व आर्थिक मुआवजे की मांग रखी।

एनएसयूआई, युवा कांग्रेस और प्रदेश कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने इस रैली को युवाओं की आवाज को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की शुरुआत बताया और कहा कि यह अभियान अब सड़क से संसद तक जारी रहेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि “छात्रों की गूंज” महारैली ने साफ संदेश दिया कि उत्तराखंड का युवा अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं, बल्कि पारदर्शी भर्ती व्यवस्था और सम्मानजनक रोजगार के लिए संगठित होकर आवाज बुलंद कर रहा है।
करीब चार-पांच घंटे तक चले इस आयोजन में डीजे की धुन पर थिरकते युवाओं के साथ बुजुर्ग और बच्चों संग पहुंचीं माताएं भी नजर आईं, जिससे रैली मुद्दे के साथ-साथ एक सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजन का रूप भी लेती दिखी। शुक्रवार रात रेसकोर्स इलाके में भारी जाम की स्थिति भी बनी रही।


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