

पौड़ी। जनगणना-2027 के द्वितीय चरण की तैयारियों को लेकर जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट सभागार में सुपरवाइजरों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू हो गई है। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने प्रशिक्षण का शुभारंभ करते हुए कहा कि प्रशिक्षित कार्मिक ही जनगणना जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रम की सफलता की कुंजी हैं।
DM ने पहले चरण के सफल आयोजन पर अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि द्वितीय चरण भी पूरी दक्षता, शुद्धता और समयबद्धता के साथ संपन्न किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह देश की विकास नीतियों, कल्याणकारी योजनाओं और संसाधनों के न्यायसंगत वितरण का आधार है। इसलिए हर सूचना का संकलन पारदर्शिता और सटीकता के साथ किया जाना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में सांख्यिकीय आंकड़ों को मोबाइल एप और पोर्टल पर दर्ज करने की व्यवहारिक प्रक्रिया सिखाई जा रही है। इस चरण में ग्रामीण क्षेत्रों की आधारभूत सुविधाओं की विस्तृत जानकारी ली जाएगी। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, संचार, बैंकिंग, विद्युत, भूमि उपयोग, कृषि और हस्तशिल्प जैसे विकास संकेतकों का डिजिटल संकलन होगा।
DM ने कहा कि राजस्व उपनिरीक्षक अपने क्षेत्रों में सर्वे कर वास्तविक आंकड़े ऑनलाइन अपलोड करेंगे। इससे केंद्र और राज्य सरकार को जमीनी स्थिति का आकलन कर आवश्यकता आधारित योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने आमजन को जनगणना के महत्व के प्रति जागरूक करने और सही जानकारी जुटाने के निर्देश भी दिए।
अपर जिलाधिकारी एफ.आर. चौहान ने कहा कि जनगणना एक महत्वपूर्ण दायित्व है। चार्ज अधिकारियों को क्षेत्रीय सीमाओं का सही निर्धारण और पुनरावृत्ति से बचने के निर्देश दिए गए। सभी पर्यवेक्षकों से फील्ड मॉनिटरिंग को प्राथमिकता देने को कहा गया।
कार्यशाला में बताया गया कि जनगणना-2027 का द्वितीय चरण 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक चलेगा। वहीं उत्तराखंड के हिमाच्छादित क्षेत्रों के लिए यह कार्य 11 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक प्रस्तावित है। इस बार जनगणना ऐतिहासिक होगी क्योंकि पूरी प्रक्रिया शत-प्रतिशत डिजिटल माध्यम से होगी। प्रगणक और पर्यवेक्षक मोबाइल एप से डेटा भरेंगे और सीएमएमएस पोर्टल से निगरानी होगी।
कार्यक्रम में तहसीलदार राजेंद्र गोस्वामी, अपर जिला सूचना विज्ञान अधिकारी हेमंत काला, मास्टर ट्रेनर शिव कुमार, कमल कर्नाटक सहित सभी राजस्व उपनिरीक्षक मौजूद थे।

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