बीएलओ की मौत/आत्महत्या का जिम्मेदार कौन ? एसआईआर के बोझ ने तोड़ा दम,जन संघर्ष मोर्चा की सरकार से हस्तक्षेप की माँग

देहरादून। बागेश्वर जिले के कांडा क्षेत्र के बांसतौली गांव में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) कमला देवी की संदिग्ध मौत ने पूरे प्रदेश में शोक और आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। रविवार सुबह उनका शव घर के पास खेत में एक पेड़ से लटका मिला, जिसके बाद पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला माना। परिजनों का आरोप है कि निर्वाचन आयोग द्वारा थोपे गए ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) के जटिल और अत्यधिक कार्यभार के चलते वह गंभीर मानसिक तनाव में थीं, जिसके कारण उन्होंने यह कदम उठाया।

पति पूरन राम के अनुसार, नोटिस वितरण और सत्यापन के दौरान लोगों की नाराजगी और अधिकारियों के लगातार फोन ने उनकी मानसिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित किया था, और वह अक्सर रातों-रात इसी काम की बातें करती थीं। हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों ने दावा किया कि उन्होंने कभी काम के दबाव की शिकायत नहीं की, लेकिन यह घटना इस बात का सबूत है कि प्रदेश भर की बीएलओ और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताएं किस भयानक मानसिक और शारीरिक शोषण का सामना कर रही हैं।

इस दुखद घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए विकासनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि बीएलओ को मिलने वाला मानदेय किसी मजदूर की एक दिन की दिहाड़ी से भी कम है, जबकि उन्हें एसआईआर जैसे अत्यंत जटिल काम को पूरे परिवार के सहयोग से निपटाना पड़ता है, यानी उनका पूरा परिवार ही इस कार्य में झोंका रहता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने एक साथ दोहरी जिम्मेदारी देकर इन कार्यकर्ताओं के साथ बहुत बड़ा अन्याय किया है, और अब समय आ गया है कि सरकार संवेदनशीलता दिखाते हुए इनके कार्यों और जिम्मेदारियों की गंभीरता को समझे।

नेगी ने यह भी आरोप लगाया कि भ्रष्ट एवं गैरजिम्मेदार मंत्रियों की कमीशनखोरी के कारण ही इन वर्कर्स को सड़े-गले अंडे, घटिया क्वालिटी के सेनेटरी नैपकिन और निम्न गुणवत्ता वाले पोषाहार का वितरण करने को मजबूर होना पड़ता है, जो न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं बल्कि बिक न पाने के कारण इनकी भरपाई भी कार्यकर्ताओं को अपनी जेब से करनी पड़ती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो रही है। मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने तुरंत इनके मानदेय, कार्यभार और कार्य परिस्थितियों में सुधार नहीं किया, तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

पत्रकार वार्ता के दौरान मोर्चा अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी के साथ संगठन के पदाधिकारी विजय राम शर्मा एवं हाजी असद भी उपस्थित रहे।

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