

श्रीनगर गढ़वाल। भारत विभाजन की त्रासद स्मृतियों को समर्पित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की ओर से चौरास परिसर स्थित एकेडमिक एक्टिविटी सेंटर में गुरुवार को एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य 1947 के विभाजन जैसी भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे त्रासद घटना की स्मृतियों को संजोते हुए उसके ऐतिहासिक, सामाजिक और मानवीय पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श करना था। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह तथा मुख्य वक्ता के रूप में नेहरू युवा केंद्र, भारत सरकार के सेवानिवृत्त सहायक निदेशक डॉ. योगेश धस्माना विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत एक वृत्तचित्र के प्रदर्शन से हुई, जिसमें 1947 के विभाजन के दौरान विस्थापित हुए लोगों के मार्मिक अनुभवों को दर्शाया गया। इसके पश्चात कार्यक्रम के नोडल अधिकारी प्रो. योगाम्बर सिंह फरस्वाण ने स्वागत उद्बोधन दिया, जबकि कार्यक्रम समन्वयक प्रो. आर.पी.एस. नेगी ने संगोष्ठी की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस दिवस को मनाने का उद्देश्य केवल अतीत की पीड़ादायक घटनाओं को याद करना नहीं, बल्कि इतिहास से सबक लेकर भविष्य में ऐसी त्रासदी की पुनरावृत्ति रोकना है।

अपने संबोधन में कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने 14 अगस्त 1947 के भारत-विभाजन को अब तक की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदी करार दिया। उन्होंने कहा कि इस विभीषिका को सर्वाधिक पीड़ा बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को झेलनी पड़ी, साथ ही इसने दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत को भी अपूरणीय क्षति पहुंचाई। कुलपति ने कहा कि बंटवारा चाहे राष्ट्र का हो, परिवार का हो या विरासत का, वह अंततः नुकसानदायक ही सिद्ध होता है।
मुख्य वक्ता डॉ. योगेश धस्माना ने अपने वक्तव्य में उत्तराखंड में आए विभाजन पीड़ितों के इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार विस्थापित परिवारों ने कोटद्वार, पौड़ी और देहरादून जैसे क्षेत्रों में नए सिरे से अपना जीवन बसाया। उन्होंने विद्वानों और शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे भविष्य में विभाजन पीड़ितों की पीड़ा और उनके साथ हुई हिंसा के विषय पर और अधिक गहन शोध कार्य करें, ताकि यह इतिहास आने वाली पीढ़ियों तक प्रामाणिक रूप से पहुंच सके।

संगोष्ठी में कार्यक्रम संयोजक डॉ. एस.एस. बिष्ट, प्रो. एन.एस. पंवार, प्रो. एम.एस. पंवार, प्रो. आर.एस. नेगी तथा मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रो. एच.बी.एस. चौहान सहित आयोजक समिति के सभी सदस्य और बड़ी संख्या में शोध छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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