वन अधिकारी केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं, प्रकृति के प्रहरी: मुख्यमंत्री धामी

इकोलॉजी और इकोनॉमी में संतुलन के साथ विकास को बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता

देहरादून। भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों के साथ संवाद करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वन अधिकारी केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रहरी हैं। उन्होंने कहा कि इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच संतुलन बनाते हुए विकास को आगे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है।

बुधवार को देहरादून में आयोजित इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह भी मौजूद रहे। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के निदेशक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खजुरिया, कोर्स निदेशक अजीता लौंगजाम सहित वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी और परिवीक्षार्थी कार्यक्रम में शामिल हुए। धामी ने उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का स्वागत करते हुए कहा कि उनका सार्वजनिक जीवन सादगी, समर्पण और राष्ट्रसेवा का उदाहरण है। जमीनी स्तर से शुरू होकर देश के द्वितीय सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की उनकी यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री ने चयनित परिवीक्षार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि वन सेवा देश की प्राकृतिक विरासत और जैव विविधता के संरक्षण में अहम भूमिका निभाती है। उत्तराखंड का लगभग 70 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है। ऐसे में वनों का संरक्षण सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा दायित्व है। जलवायु परिवर्तन की चुनौती का जिक्र करते हुए धामी ने कहा कि वन अधिकारियों को आधुनिक तकनीक और प्रशासनिक दक्षता के साथ स्थानीय समुदायों के हितों को भी प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने कहा कि वन अधिकारियों को अपने अधिकारों के साथ जिम्मेदारियों और ज्ञान के साथ संवेदनशीलता को सर्वोच्च स्थान देना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत’ के संकल्प का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को समान महत्व दिया जा रहा है। ‘मिशन LiFE’ और ‘एक पेड़ माँ के नाम’ जैसे अभियानों से पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ा गया है।धामी ने राज्य सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए बताया कि सबसे बड़े अतिक्रमण विरोधी अभियान में लगभग 13 हजार एकड़ वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां समर्पित फॉरेस्ट ड्रोन फोर्स का गठन हुआ है। चारधाम यात्रा मार्ग पर डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम लागू किया गया है, जिसे जल्द अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ाया जाएगा।

उन्होंने राजाजी टाइगर रिजर्व से गुजरने वाले दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर 12 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड वन्यजीव कॉरिडोर को आधुनिक बुनियादी ढांचे और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन का उदाहरण बताया।सरकार ने वन उपज के परिवहन के लिए नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम लागू किया है। मानव-वन्यजीव संघर्ष में जनहानि पर अनुग्रह राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपये की गई है। वन पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए नियमावली में संशोधन, फायर वॉचर्स के लिए जीवन बीमा और पिरुल एकत्रीकरण से रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बायोफेंसिंग, त्वरित प्रतिक्रिया दल और 24 घंटे सक्रिय वन्यजीव हेल्पलाइन 1926 जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष कम हो सके।उन्होंने विश्वास जताया कि युवा वन अधिकारी इकोलॉजी और इकोनॉमी में संतुलन के दृष्टिकोण को अपनाकर देश की प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

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