

देहरादून : पत्रकारिता की दुनिया अक्सर सूखी खबरों और ताज़ा अपडेट्स तक सीमित नज़र आती है, लेकिन उत्तरांचल प्रेस क्लब के सभागार में शनिवार की शाम यह धारणा पूरी तरह चूर-चूर हो गई। म्यूजिकल नाइट के दौरान रिपोर्टर, एडिटर और कैमरामैन — सभी ने अपनी रिपोर्टिंग की दुनिया से अलग एक रचनात्मक पहचान पेश की।
कार्यक्रम का आगाज़ क्लब अध्यक्ष अजय राणा ने उपस्थित गणमान्य अतिथियों के साथ दीप प्रज्ज्वलन से किया। इसके बाद जैसे ही संगीत की पहली सुरीली लहर फैली, मंच ने एक नया जीवन पा लिया।
शाम की खासियत रही शायरी की वो पंक्तियाँ जिन्होंने पूरे कमरे को स्तब्ध कर दिया। कुछ पत्रकारों ने अपनी रचनाओं के ज़रिए पत्रकारिता की विडंबनाओं पर चोट की, तो कई ने मोहब्बत और बिछड़न के किस्से सुनाकर भावुक कर दिया। दर्शक दीर्घा में बैठे लोग एक-एक शब्द को साँस रोककर सुनते रहे।

गीतों के दौर में जब क्लब सदस्यों ने अपने लिखे हुए गाने पेश किए, तो पहाड़ी लोकधुनों ने वातावरण में उत्तराखंड की मिट्टी की सुगंध घोली। वहीं युवा पत्रकारों ने आधुनिक बीट्स पर अपनी प्रस्तुति देकर समकालीन पीढ़ी का प्रतिनिधित्व किया।
सबसे सरप्राइजिंग पल वह आया जब कुछ पत्रकार सहयोगियों ने डांस फ्लोर पर कदम रखा। थिरकते कदम और बेहतरीन कोरियोग्राफी ने साबित कर दिया कि खबरों के पीछे दौड़ने वाली टीम में कलाकारों की कोई कमी नहीं।
सहकर्मियों ने स्वीकारा कि इस शाम ने उनके नज़रिए को बदल दिया है। रोज़ाना सुबह-शाम अखबार और चैनलों के लिए दौड़ने वाले लोग आज एक-दूसरे को नए नज़रिए से देख पाए। क्लब प्रबंधन ने संकेत दिया कि अब इस तरह के आयोजन नियमित होंगे, ताकि हर पत्रकार को अपनी छिपी प्रतिभा को मंच देने का अवसर मिले।

शाम का समापन एकता गान के साथ हुआ, जिसमें सभी ने मिलकर संगीत और सौहार्द का संदेश दिया। यह आयोजन सिर्फ एक रात नहीं, बल्कि उत्तरांचल प्रेस क्लब के लिए एक नई परंपरा की शुरुआत बन गया।

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