

देहरादून। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य द्वारा प्रदेश की 7 हजार बीघा सरकारी भूमि को लेकर दिए गए बयानों पर भाजपा ने कड़ा पलटवार किया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता एवं धर्मपुर विधायक विनोद चमोली ने कहा कि कांग्रेस को तथ्यों पर राजनीति करने के बजाय पहले अपने शासनकाल का रिकॉर्ड देखना चाहिए।
चमोली ने कहा कि जिस कांग्रेस ने उत्तराखंड राज्य निर्माण का विरोध किया, वही आज तेजी से हो रहे विकास को देखकर बौखलाहट में निराधार आरोप लगा रही है। बेशकीमती जमीनों की बंदरबांट करने वाले आज किस मुंह से सवाल उठा रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि आईटी पार्क देहरादून की जिस जमीन पर आईटी इंडस्ट्री विकसित होनी थी, उसे बिल्डरों को कौड़ियों के दाम पर किसने बेचा? सिटी पार्क लैंडयूज की जमीन का लैंडयूज बिना पैसा जमा कराए बदलकर राज्य को करोड़ों के राजस्व का नुकसान किसने पहुंचाया? 2006 में सिडकुल के माध्यम से सुपरटेक और प्लेनेट इंफ्रा को कौड़ियों के भाव भूमि किसने दी और 2013 में देहरादून आईटी पार्क में जीटीएम बिल्डर को जमीन देकर सीएजी ऑडिट आपत्तियों का कारण कौन बना?
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि बंदरबांट और करीबियों को लाभ पहुंचाने का आरोप कांग्रेस का अपना इतिहास रहा है। कांग्रेस के समय में मालिकाना हक देकर जमीनों की बंदरबांट की गई, जबकि धामी सरकार की नीति स्पष्ट और पारदर्शी है। उत्तराखंड की जमीन किसी को बेची नहीं जा रही, मालिकाना हक सरकार के पास ही रहेगा। केवल लीज मॉडल के माध्यम से निवेश लाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पर्वतीय राज्य में यदि भूमि वर्षों तक अनुपयोगी पड़ी रहे तो रोजगार पैदा नहीं होता। यूआईआईडीबी के माध्यम से खाली पड़ी सरकारी जमीनों का सुनियोजित उपयोग कर पर्यटन, वेलनेस, शिक्षा, स्वास्थ्य और आतिथ्य क्षेत्र में निवेश लाया जा रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।
चमोली ने कहा कि कांग्रेस शासन में उद्योगों और निजी आवासीय परियोजनाओं के लिए भूमि दी गई तो वह विकास था, लेकिन आज जब सरकार स्वामित्व बरकरार रखते हुए रोजगार के लिए लीज नीति अपना रही है तो कांग्रेस को दर्द क्यों हो रहा है। जनता कांग्रेस के विकास विरोधी चेहरे को पहचान चुकी है।

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