

देहरादून।उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष लालचंद शर्मा ने UPI के माध्यम से होने वाले चुनिंदा व्यापारी लेन-देन पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू किए जाने के निर्णय को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जिस UPI व्यवस्था को देश की डिजिटल क्रांति और आम आदमी की सुविधा का माध्यम बताया गया, अब उसी व्यवस्था पर शुल्क लगाने की शुरुआत की जा रही है।
श्री शर्मा ने कहा कि ₹2,000 से अधिक के व्यापारी UPI लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू करने का निर्णय छोटे व्यापारियों और डिजिटल भुगतान पर निर्भर कारोबारियों के लिए चिंता का विषय है। सरकार भले ही इसे उपभोक्ताओं पर सीधे लागू नहीं होने की बात कह रही हो, लेकिन व्यापारियों पर बढ़ने वाली लागत का असर अंततः बाजार और उपभोक्ताओं तक पहुंचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों में UPI ने देश में कैशलेस और डिजिटल भुगतान को तेजी से बढ़ावा दिया है। छोटे दुकानदार, स्वरोजगार से जुड़े लोग और आम नागरिक इसे रोजमर्रा के लेन-देन के लिए इस्तेमाल करते हैं। ऐसे समय में शुल्क व्यवस्था लाना सरकार की डिजिटल भुगतान नीति की दिशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि UPI जैसी सार्वजनिक डिजिटल भुगतान व्यवस्था की लागत का भार व्यापारियों पर डालने की आवश्यकता क्यों पड़ी और इससे भविष्य में आम उपभोक्ताओं पर किसी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा, इसकी गारंटी क्या है।
श्री शर्मा ने कहा कि सरकार को डिजिटल भुगतान को और अधिक सुलभ एवं किफायती बनाने की दिशा में काम करना चाहिए, न कि ऐसी व्यवस्था तैयार करनी चाहिए जिससे व्यापारियों में अतिरिक्त लागत और उपभोक्ताओं में शुल्क को लेकर असमंजस पैदा हो।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि UPI शुल्क व्यवस्था के संभावित प्रभावों को लेकर व्यापारियों और आम जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए पूरी पारदर्शिता के साथ स्थिति स्पष्ट की जाए और किसी भी अप्रत्यक्ष आर्थिक बोझ से आम उपभोक्ताओं को सुरक्षित रखा जाए।

Recent Comments