बजाज इंस्टीट्यूट का नया सफर शुरू, बधिर बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों के बीच नए भवन का उद्घाटन

देहरादून। 12 अप्रैल का दिन बाजाज इंस्टीट्यूट ऑफ लर्निंग फॉर द डेफ के लिए एक विशेष और यादगार अवसर बन गया, जब संस्थान ने अपने नए विद्यालय भवन का उद्घाटन किया और बधिर बच्चों को सशक्त बनाने की अपनी 26 वर्षों की समर्पित यात्रा का उत्सव मनाया।

एक छोटे से प्रयास के रूप में शुरू हुई यह पहल, जिसका उद्देश्य बधिर बच्चों को सहयोग और प्रोत्साहन देकर उन्हें गरिमापूर्ण जीवन जीने में सक्षम बनाना था, आज एक मजबूत और सशक्त समुदाय का रूप ले चुकी है। शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह संस्थान इस स्तर तक विस्तार करेगा और शिक्षा, कौशल विकास तथा जागरूकता के माध्यम से अनगिनत जीवनों को प्रभावित करेगा।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री राज शेखर जोशी वाइस चेयरमैन सेतु आयोग गवर्नमेंट ऑफ़ उत्तराखंड, चेयरपर्सन श्रीमती बाजाज तथा प्रिंसिपल डॉ. पुनीत बसुर उपस्थित रहे। प्रबंधन समिति और निदेशक मंडल के सदस्य भी कार्यक्रम में शामिल हुए, जिससे यह आयोजन संस्थान की यात्रा में योगदान देने वाले सभी लोगों का एक महत्वपूर्ण संगम बन गया। लेंसकार्ट जैसे सहयोगी संस्थानों और अनेक गुमनाम दानदाताओं के निरंतर समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया गया, जिन्होंने इस उपलब्धि को संभव बनाने में अहम भूमिका निभाई।

वर्षों के दौरान संस्थान ने केवल बुनियादी शिक्षा तक ही सीमित न रहकर समग्र विकास पर भी ध्यान दिया है, जिसमें व्यावसायिक प्रशिक्षण और पूर्व छात्रों के सफल रोजगार की व्यवस्था शामिल है। इसके साथ ही कार्यस्थलों को संवेदनशील बनाना, समान अवसरों को बढ़ावा देना और श्रवण बाधित व्यक्तियों को आत्मविश्वास एवं सम्मान के साथ आगे बढ़ने में सक्षम बनाना भी संस्थान के प्रमुख उद्देश्यों में रहा है।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण छात्रों द्वारा प्रस्तुत एक संगीतमय प्रस्तुति “रेज़ोनेंस – ए जर्नी बियॉन्ड साउंड” रही। इस प्रस्तुति ने खूबसूरती से यह संदेश दिया कि अभिव्यक्ति केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि दृढ़ संकल्प, भावनाएं और प्रतिभा हर बाधा को पार कर सकती हैं। यह प्रस्तुति समावेशन, दृढ़ता और हर व्यक्ति की असीम संभावनाओं का एक सशक्त उदाहरण बनी, चाहे उसकी शारीरिक सीमाएं कुछ भी हों।

जहां एक ओर संस्थान इस महत्वपूर्ण उपलब्धि का जश्न मना रहा है, वहीं यह भी समझता है कि आगे की यात्रा नई चुनौतियों से भरी है। विकास के साथ जिम्मेदारियां भी बढ़ती हैं, और बधिर समुदाय को सशक्त बनाने का संकल्प अब और अधिक दृढ़ता के साथ जारी रहेगा।

यह उद्घाटन केवल एक नए भवन का शुभारंभ नहीं है, बल्कि यह दृढ़ संकल्प, दूरदृष्टि और एक ऐसे समुदाय के सामूहिक प्रयास का प्रतीक है, जो एक अधिक समावेशी और समान समाज के निर्माण में विश्वास रखता है।

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