हेमकुंड यात्रा के सफल संचालन पर भाजपा ने जताया संतोष, जनता का किया आभार

देवभूमि की छवि खराब करने और सद्भाव बिगाड़ने की साजिशें हुई नाकाम : भट्ट

निहंग प्रकरण ने विपक्ष के गैरजिम्मेदाराना रवैए की खोली पोल

देहरादून  । भाजपा ने हेमकुंड साहिब यात्रा के सफल, सुचारू और शांतिपूर्ण ढंग से संचालन पर संतोष व्यक्त किया है।
प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कहा कि देवभूमि की महान संस्कृति, मेहमाननवाजी और सौहार्द को चोट पहुंचाने की कुछ स्वार्थी तत्वों की कोशिशें पूरी तरह नाकाम साबित हुई हैं। उन्होंने इसके लिए स्थानीय निवासियों और सिक्ख समाज के सहयोग एवं धामी सरकार की सूझबूझ की प्रशंसा करते हुए, विपक्षी गैरजिम्मेदारान रवैए की कड़ी आलोचना की है।

मीडिया के सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि विगत दिनों हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना की आड़ में कुछ असामाजिक तत्वों और राजनीतिक दलों द्वारा माहौल खराब करने, सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने और देवभूमि की छवि को धूमिल करने के सुनियोजित प्रयास किए गए थे। लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार और शासन-प्रशासन ने अत्यंत गंभीरता, संवेदनशीलता, तत्परता और सूझबूझ के साथ काम करते हुए स्थिति को बिगड़ने से बचा लिया। वहीं प्रदेश की जागरूक जनता और सभी समाजों के जिम्मेदार नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके धैर्य और समझदारी के कारण ही हालात बेहद कम समय में हालात सामान्य हो गए हैं। इसी का परिणाम है कि हिंदू-सिख भाइयों के बीच ऐतिहासिक सद्भाव को बिगाड़ने और उत्तराखंड की अतिथि देवो भवः की छवि को नुकसान पहुंचाने की साजिशें औंधे मुंह गिरीं।

उन्होंने विरोधियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पंजाब चुनाव और क्षेत्रीय राजनीति चमकाने के लिए इसका इस्तेमाल एजेंडे की तरह किया गया। कुछ लोग पंजाब में अपनी लगातार गिरती राजनीतिक साख को बचाने के लिए उत्तराखंड में निहंगों के साथ एक बड़े टकराव की पटकथा लिख रहे थे, ताकि पंजाब के आगामी चुनावों में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का माहौल बनाया जा सके। वहीं राज्य के कुछ ऐसी पार्टियां, जिनका उत्तराखंड की राजनीति से वजूद लगभग समाप्त हो चुका है, वे अपनी राजनीतिक जमीन वापस पाने के लिए राज्य को क्षेत्रवाद के आत्मघाती दलदल में घसीटने का कुत्सित प्रयास कर रहे थे।

इसी तरह उन्होंने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि संकट के इस समय में कांग्रेस ने एक जिम्मेदार राष्ट्रीय पार्टी की भूमिका निभाने के बजाय बेहद गैर-जिम्मेदाराना रुख अपनाया। कांग्रेस नेतृत्व ने हालात को शांत करने में सहयोग देने के बजाय, केवल राजनीतिक लाभ उठाने के उद्देश्य से बयानबाजी की और आग में घी डालने का प्रयास किया।

उन्होंने विश्वास दिलाया कि भाजपा सरकार राज्य की शांति, सुरक्षा और भाईचारे से समझौता करने वाले किसी भी तत्व को बख्शने वाली नहीं है। साथ देवभूमि की अस्मिता और सर्वधर्म समभाव की परंपरा अक्षुण्ण रखने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य करती रहेगी।

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