देहरादून,23मार्च 2025(आरएनएस )आगामी चारधाम यात्रा के दौरान संभावित आपदाओं से निपटने के लिए उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और यूएसडीएमए मिलकर अप्रैल में मॉक ड्रिल आयोजित करेंगे, जिससे विभिन्न विभागों की तैयारियों को परखा जाएगा। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने इस संबंध में अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ बैठक कर मॉक ड्रिल की रणनीति पर चर्चा की।
चारधाम यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता: सुमन
सचिव श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में चारधाम यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। एनडीएमए से प्राप्त टेंटेटिव शेड्यूल के अनुसार, 14 अप्रैल को ओरिएंटेशन एवं कोऑर्डिनेशन कॉन्फ्रेंस, 22 अप्रैल को टेबल टॉप एक्सरसाइज और 24 अप्रैल को मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इस दौरान पुलिस प्रशासन, परिवहन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ सहित कई विभागों की भूमिका को परखा जाएगा।
प्रत्येक धाम का बनेगा डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान
बैठक में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन श्री आनंद स्वरूप ने प्रत्येक धाम के लिए अलग-अलग डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इससे आपदाओं के दौरान तेजी से कार्रवाई की जा सकेगी। साथ ही, चारधाम यात्रा से जुड़े सभी जिलों के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार करने की भी जरूरत बताई गई।

पिछले साल के अनुभवों से सीख लेकर तैयारी
अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) डीआईजी श्री राजकुमार नेगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पिछले वर्षों की आपदाओं का विश्लेषण कर कमियों को दूर किया जाए। यात्रा के दौरान हुए भूस्खलन, मार्ग अवरुद्ध होने, भीड़ प्रबंधन और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं के समाधान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
चारधाम यात्रा के लिए प्रमुख जिले और ट्रांजिट जिले
चारधाम यात्रा को लेकर उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग को मुख्य जिले माना गया है, जबकि टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार और देहरादून ट्रांजिट जिले हैं।
मॉक ड्रिल में परखा जाएगा सुरक्षा प्रबंधन
मॉक ड्रिल के दौरान यह देखा जाएगा कि यदि यात्रा के दौरान भगदड़, अतिवृष्टि, भूस्खलन या ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है, तो विभिन्न विभाग किस तरह से यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। जिलों को अपने अस्पतालों, हेलीपैड और वैकल्पिक मार्गों की जीआईएस लोकेशन यूएसडीएमए के साथ साझा करनी होगी।
मॉक ड्रिल के जरिए आपदा के समय रिस्पांस टाइम को कम करने और यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के प्रयास किए जाएंगे।

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