

छुआछूत और जातिवाद के नाम पर भ्रम फैलाना दुर्भाग्यपूर्ण
देहरादून। भाजपा के वरिष्ठ नेता, प्रदेश प्रवक्ता एवं धर्मपुर विधायक विनोद चमोली ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर उत्तराखंड की सामाजिक समरसता को लेकर अनर्गल आरोप लगाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस तुष्टिकरण और सामाजिक समरसता पर चोट पहुंचाने की कोशिश में है। प्रदेश की जनता ने कभी जाति, धर्म अथवा वर्ग के आधार पर बांटने की राजनीति को स्वीकार नहीं किया है।
चमोली ने कहा कि आज जब पूरी दुनिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सनातन संस्कृति की पताका लहरा रही है, तब कांग्रेस छुआछूत और जातिवाद जैसे मुद्दों को जबरन राजनीतिक रंग देकर समाज में भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है। चुनाव नजदीक देखकर ऐसे विषयों को अनावश्यक रूप से तूल देकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि भाजपा कभी भी जाति, धर्म या वर्ग के आधार पर समाज को बांटने का कार्य नहीं करती और न ही ऐसी किसी गतिविधि का समर्थन करती है। भाजपा का प्रयास सदैव समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर विकास और सामाजिक समरसता के मार्ग पर आगे बढ़ने का रहा है।
चमोली ने कहा कि कांग्रेस को तथ्यों के बिना शुद्धीकरण कार्यक्रम को भाजपा से जोड़कर राजनीतिक भ्रम फैलाना बंद करना चाहिए। संबंधित कार्यक्रम का आयोजन राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास नामक एक सामाजिक संस्था द्वारा किया गया था और संस्था की ओर से स्वयं स्पष्ट किया गया है कि उसका भाजपा से कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने कहा कि बिना किसी ठोस तथ्य के कार्यक्रम को भाजपा से जोड़ना कांग्रेस की राजनीतिक हताशा को दर्शाता है। तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति के लिए कांग्रेस धार्मिक और सामाजिक घटनाओं को भी राजनीतिक विवाद का रूप देने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस को ऐसी राजनीति से ऊपर उठकर प्रदेश की एकता, शांति और सामाजिक सौहार्द की चिंता करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस दलित मुद्दों की आड़ में राजनीति कर रही है, जबकि कई अन्य विवादों पर उसके नेताओं की चुप्पी भी सवाल खड़े करती है। रामलीला से जुड़े विवाद में कथित रूप से अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाए जाने को लेकर कांग्रेस नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठते हैं। अब अपने राजनीतिक असहज सवालों से ध्यान हटाने के लिए कांग्रेस सनातन समाज को बांटने का प्रयास कर रही है।
चमोली ने कहा कि कांग्रेस को पहले अपनी चुप्पी का जवाब देना चाहिए और उसके बाद भाजपा नेताओं पर निराधार आरोप लगाने चाहिए। केवल SC-ST Act का हवाला देकर किसी पूरे मामले को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। किसी कानून का नाम लेने और उस कानून के तहत अपराध सिद्ध होने के बीच स्पष्ट कानूनी अंतर होता है।
उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस से सवाल किया कि यदि वे इस मामले में SC-ST Act के तहत अपराध बनने का दावा कर रहे हैं, तो उसका ठोस कानूनी आधार स्पष्ट करें। केवल किसी कानून का हवाला देकर राजनीतिक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति या संगठन पर दलित विरोधी मानसिकता का आरोप बेहद गंभीर है और इसके समर्थन में ठोस आधार होना आवश्यक है। राहुल गांधी का दावा है कि यह घटना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की दलित पहचान के कारण हुई, जबकि संबंधित आयोजक संस्था ने ऐसी किसी मंशा से स्पष्ट इनकार किया है। ऐसे में कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि उसके आरोप का वास्तविक और तथ्यात्मक आधार क्या है।

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