

नेता प्रतिपक्ष के नाक से खून निकलने पर उत्तराखंड कांग्रेस भड़की, धीरेंद्र प्रताप ने गृहमंत्री अमित शाह से मांगी राहुल गांधी की पुख्ता सुरक्षा
देहरादून । केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को हिरासत में लिए जाने के विरोध में देहरादून में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने देर शाम लोक भवन की ओर कूच किया। पुलिस ने हाथीबड़कला में बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद मौके पर कुछ देर के लिए तनावपूर्ण स्थिति बन गई।
शाम करीब साढ़े आठ बजे प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना के नेतृत्व में लगभग दो सौ कार्यकर्ता कैंट रोड स्थित सेंटरो मॉल के निकट एकत्रित हुए और लोक भवन की ओर धरना-प्रदर्शन के लिए कूच किया। कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ते देख पुलिस ने हाथीबड़कला में बैरिकेडिंग लगाकर रोकने का प्रयास किया, लेकिन आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने घेराबंदी तोड़ दी और बैरिकेड पर चढ़ गए। इसके बाद पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच करीब आधे घंटे तक तीखी नोंकझोंक और धक्का-मुक्की चलती रही।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने सूर्यकांत धस्माना, राजेंद्र भंडारी, डॉ. जसविंदर सिंह गोगी, सुजाता पॉल, प्रतिमा सिंह, सोनिया आनंद, सुमित खन्ना, वीरेंद्र पोखरियाल और पिया थापा समेत करीब सौ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन भेज दिया। गिरफ्तारी से पहले सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि पेपर लीक जैसे मुद्दों पर सरकार की चुप्पी और छात्रों के आंदोलन पर हुए दमन के खिलाफ यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक देश के युवा छात्रों को न्याय नहीं मिल जाता।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस की पहली बैरिकेडिंग तोड़ते हुए आगे बढ़ने की कोशिश की और दूसरी बैरिकेडिंग पर पहुंचकर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पार्टी की स्थानीय इकाई का कहना है कि यह प्रदर्शन 20 जुलाई को दिल्ली में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में हुए पीएम आवास मार्च के समर्थन में आयोजित किया गया था, जिसमें समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी शामिल हुए थे। बताया गया कि दिल्ली पुलिस ने इस दौरान राहुल गांधी और अखिलेश यादव समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया था, जिन्हें कुछ ही समय बाद रिहा कर दिया गया।

प्रदेश प्रवक्ता प्रतिमा सिंह ने आरोप लगाया कि सदन में छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई का मुद्दा नहीं उठाने दिया गया, जिसके चलते नेताओं को संसद के बाहर प्रदर्शन करना पड़ा। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करार दिया। वहीं यूथ कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष स्वाति नेगी ने कहा कि छात्रों के साथ हुए बर्ताव और अब नेताओं के साथ की जा रही कार्रवाई एक जैसी है, और उन्होंने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग दोहराई।
इसी कड़ी में उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने पार्टी के अन्य महासचिवों व उपाध्यक्षों विजय सारस्वत, नवीन जोशी, मनीष नागपाल और राजेंद्र भंडारी के साथ जारी संयुक्त बयान में केंद्र सरकार पर नेता प्रतिपक्ष की सुरक्षा से खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया। बयान में कहा गया कि प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी की नाक पर चोट लगने से खून बहा, जो यह दर्शाता है कि उनकी सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। धीरेंद्र प्रताप ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस तरह एक निर्वाचित नेता प्रतिपक्ष को सुरक्षा के अभाव में चोट झेलनी पड़ी, वह पूरे लोकतांत्रिक तंत्र के लिए चिंता का विषय है और इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।


कांग्रेस नेताओं ने संयुक्त बयान में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मांग की कि राहुल गांधी सहित आंदोलन में शामिल अन्य नेताओं की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। उन्होंने कहा कि हर भारतीय नागरिक का जीवन अनमोल है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान किसी भी तरह का दमन देश के लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला है।

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