देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर उत्तराखंड के प्रति अपने विशेष लगाव और ‘लोकल कनेक्ट’ से देवभूमि की जनता का दिल जीत लिया। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे के भव्य उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री न केवल विकास की सौगातें लेकर आए, बल्कि उनके संबोधन में उत्तराखंड की संस्कृति, भाषा और परंपराओं की गहरी छाप देखने को मिली।
ब्रह्मकमल टोपी और पहाड़ी बोली का संगम
प्रधानमंत्री जब मंच पर आए, तो उनके सिर पर सुशोभित ब्रह्मकमल टोपी ने सबका ध्यान खींचा। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत कुमाऊंनी और गढ़वाली के चिर-परिचित शब्दों से की। संबोधन में “भुला-भुलियों, सयाणा, आमा और बाबा” जैसे अपनों वाले शब्दों का प्रयोग होते ही पूरा पंडाल मोदी-मोदी के नारों से गूंज उठा। प्रधानमंत्री ने सिद्ध किया कि उनके लिए उत्तराखंड महज एक राज्य नहीं, बल्कि भावनाओं का केंद्र है।
आध्यात्मिक जुड़ाव: डाट काली से पंच केदार तक
प्रधानमंत्री ने एक्सप्रेस-वे के निर्माण को मां डाटकाली का आशीर्वाद बताया। उन्होंने कहा कि देहरादून पर मां की विशेष कृपा है। इसके साथ ही उन्होंने संतला माता मंदिर का स्मरण कर स्थानीय आस्था को सम्मान दिया।हरिद्वार कुंभ, नंदा राजजात का उल्लेख कर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को सराहा। पंच बदरी, पंच केदार और पंच प्रयाग का जिक्र कर उत्तराखंड की आध्यात्मिक शक्ति को रेखांकित किया।
धामी-मोदी की जुगलबंदी: ‘युवा और कर्मठ’ मुख्यमंत्री
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बीच की मजबूत बॉन्डिंग स्पष्ट रूप से दिखाई दी। पीएम मोदी ने धामी को लोकप्रिय, कर्मठ और युवा’ मुख्यमंत्री कहकर उनकी पीठ थपथपाई। जब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी संबोधित कर रहे थे, तब भी पीएम मोदी और सीएम धामी के बीच गहन चर्चा होती दिखी, जो राज्य के विकास के प्रति दोनों की गंभीरता को दर्शाता है।
विकास के साथ विरासत का सत्कार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति की सबसे बड़ी ताकत है— ‘जड़ों से जुड़ाव’। मंगलवार को देहरादून में उन्होंने यह फिर साबित किया। एक्सप्रेस-वे ईंट-पत्थर और डामर का ढांचा मात्र नहीं है, मोदी ने इसे उत्तराखंड के ‘भाग्य’ से जोड़ दिया।
अक्सर नेता मंचों से भारी-भरकम आंकड़े गिनाते हैं, लेकिन मोदी ने ‘आमा-बुबू’ की भाषा बोलकर उस आखिरी व्यक्ति तक अपनी पहुंच बनाई जो शायद एक्सप्रेस-वे की तकनीकी बारीकियों को न समझता हो, पर अपनी भाषा के सम्मान को बखूबी समझता है। मुख्यमंत्री धामी को ‘युवा और कर्मठ’ का सर्टिफिकेट देना केवल प्रशंसा नहीं, बल्कि दिल्ली का देहरादून पर अटूट भरोसे का संकेत है। यह ‘डबल इंजन’ की वह रफ़्तार है, जहां विकास की पटरी पर सांस्कृतिक गौरव का इंजन सबसे आगे दौड़ रहा है।
निश्चित ही, आज का दिन विकास के नाम रहा , पर चर्चा मोदी के उस ‘पहाड़ी प्रेम’ की है जिसने दूर बैठे सीमांत गांवों के ग्रामीण को भी यह महसूस कराया कि ‘दिल्ली’ उनके बहुत करीब है।

Recent Comments