एसएसपी परमेद्र डोबाल :”खाकी का ‘मैनेजमेंट गुरु’ अवतार

देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देहरादून दौरे के दौरान दून पुलिस ने प्रबंधन की एक नई मिसाल पेश की है। एसएसपी परमेंद्र डोबाल के कुशल नेतृत्व में पुलिस बल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत में उमड़ी  लगभग 75 हजार लोगों की भारी भीड़ और वीवीआईपी मूवमेंट को इस तरह संभाला कि शहर की रफ्तार कहीं नहीं थमी। बिना किसी जाम के इतने बड़े आयोजन को संपन्न कराना दून पुलिस की एक ‘धमाकेदार’ कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है।

डोभाल की व्यूह रचना: जीरो जोन में भी सुगम रहा सफर
राजधानी की भौगोलिक स्थिति और संकरी सड़कों के बावजूद एसएसपी परमेंद्र डोभाल ने सुरक्षा और यातायात के बीच ऐसा संतुलन बनाया कि आम जनता को असुविधा नहीं हुई।
माइक्रो मैनेजमेंट: कार्यक्रम स्थल के चारों ओर रूट डायवर्जन को इस तरह लागू किया गया कि वीआईपी काफिले और जनता की गाड़ियों के बीच टकराव नहीं हुआ।
मुस्तैद फोर्स: एसएसपी खुद घंटों तक वायरलेस सेट के साथ मोर्चे पर डटे रहे और चप्पे-चप्पे पर तैनात फोर्स का मनोबल बढ़ाते नजर आए।
तकनीकी निगरानी: ड्रोन और सीसीटीवी के जरिए ट्रैफिक के दबाव को रियल-टाइम मॉनिटर किया गया।

पीएम के दौरे में ‘स्मूथ’ रही राजधानी
अमूमन वीवीआईपी दौरों पर शहर घंटों तक थम जाता है, लेकिन इस बार तस्वीर बदली हुई थी। 75 हजार लोगों का हुजूम जब कार्यक्रम खत्म होने के बाद एक साथ सड़कों पर उतरा, तब भी एसएसपी डोबाल की रणनीति के कारण यातायात व्यवस्था कुछ ही मिनटों में सामान्य हो गई। स्थानीय निवासियों और पर्यटकों ने भी दून पुलिस के इस ‘स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट’ की मुक्तकंठ से प्रशंसा की है।

किसी भी जिले के कप्तान के लिए प्रधानमंत्री का दौरा ‘अग्निपरीक्षा’ से कम नहीं होता। सुरक्षा की अभेद्य दीवार भी खड़ी करनी होती है और जनता की सुविधा का ख्याल भी रखना होता है। एसएसपी परमेंद्र डोबाल ने इस परीक्षा को ‘डिस्टिंक्शन’ के साथ पास किया है।
आंकड़ों से इतर अगर एक सामान्य नागरिक की नजर से देखें, तो यह सिर्फ ड्यूटी नहीं बल्कि एक ‘इंजीनियरिंग’ थी। जब 75 हजार लोग एक सीमित दायरे में जमा हों, तो अव्यवस्था की गुंजाइश 100% होती है। लेकिन डोबाल की टीम ने इसे शून्य कर दिया। सड़कों पर तैनात सिपाही से लेकर आला अधिकारियों तक के बीच जो ‘कमांड एंड कंट्रोल’ दिखा, वह काबिले तारीफ है।

अक्सर पुलिस अपनी सख्त कार्यशैली के लिए जानी जाती है, लेकिन आज की सफलता ने दून पुलिस की छवि एक ‘सक्षम प्रबंधक’ (Efficient Manager) की बना दी है। परमेंद्र डोभाल के इस ‘देहरादून मॉडल’ की चर्चा आने वाले समय में बड़े आयोजनों के लिए एक मानक (Benchmark) के रूप में की जाएगी।

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