
जहर देकर शिकार और पंजे गायब होने के मामले में बढ़ी कार्रवाई, NTCA की टीम भी कर सकती है जांच
हरिद्वार। हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज में दो बाघों के संदिग्ध शिकार मामले ने वन विभाग में हड़कंप मचा दिया है। मामले को गंभीर मानते हुए विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रेंज अधिकारी समेत तीन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। प्रमुख वन संरक्षक (HoFF) की ओर से जारी आदेश के अनुसार प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई है।
निलंबित किए गए अधिकारियों में श्यामपुर रेंज के रेंजर विनय कुमार राठी, फॉरेस्टर भूपेंद्र बिष्ट और फॉरेस्ट गार्ड करुण सैनी शामिल हैं। विभागीय आदेश के मुताबिक निलंबन अवधि के दौरान संबंधित अधिकारी हरिद्वार वन प्रभाग कार्यालय से संबद्ध रहेंगे।
दरअसल कुछ दिन पहले श्यामपुर रेंज के सजनपुर बीट क्षेत्र में दो बाघों के शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। शुरुआती जांच में सामने आया कि शिकारियों ने बाघों को जहर देकर मारा। इतना ही नहीं, बाघों के पंजे काटकर ले जाने की बात भी सामने आई, जिससे वन्यजीव तस्करी के एंगल को लेकर भी जांच तेज हो गई है।
वन विभाग ने मामले में अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि कुछ संदिग्ध अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। जांच के दौरान क्षेत्रीय स्तर पर गश्त और निगरानी व्यवस्था में गंभीर कमियां सामने आने की संभावना जताई जा रही है। इसी आधार पर विभाग ने जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई की।
इस घटना ने राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है। सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की टीम जल्द उत्तराखंड पहुंच सकती है। NTCA इस पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीरता से देख रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि बाघों के अंग गायब होने की बात सामने आई है।
गौरतलब है कि हरिद्वार वन प्रभाग पहले भी वन्यजीव अपराधों को लेकर सवालों में रहा है। बीते महीनों में सांपों के जहर की तस्करी और हाथियों की मौत जैसे मामलों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे।
वन विभाग का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और यदि अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका सामने आती है तो आगे और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस घटना ने उत्तराखंड में वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था और जमीनी निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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