हिमालयी गांवों में जल संकट और जलवायु खतरों की पड़ताल करने पहुंचे HNB विश्वविद्यालय के छात्र, एक महीने की इंटर्नशिप का हुआ समापन

हिमाचल और उत्तराखंड के पांच गांवों में किया क्षेत्रीय अध्ययन, जल स्रोतों के संरक्षण पर जोर

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग तथा इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर वीमेन, दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर हिमालयन रिसर्च के संयुक्त तत्वावधान में संचालित हिम-केयर (हिमालयन क्लाइमेट एडप्टेशन एंड रेजिलिएंस एजुकेशन प्रोग्राम) के तहत एक माह के प्रशिक्षण एवं इंटर्नशिप कार्यक्रम का मंगलवार को गरिमापूर्ण समापन समारोह आयोजित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जनपद के नंदरूल एवं राजल तथा उत्तराखंड के टिहरी जनपद के जखन्याली, मंदार एवं कठुली गांवों में व्यापक क्षेत्रीय अध्ययन किया। अध्ययन के दौरान प्रतिभागियों ने स्थानीय समुदायों से संवाद कर उनकी आजीविका, प्राकृतिक संसाधनों एवं पर्यावरणीय चुनौतियों को समझने का प्रयास किया। साथ ही प्राकृतिक संसाधनों का मानचित्रण, जल स्रोतों की वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन तथा पारंपरिक ज्ञान एवं स्थानीय जल प्रबंधन प्रणालियों का प्रलेखन भी किया गया। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों, जल सुरक्षा एवं आपदा जोखिम न्यूनीकरण से जुड़े विभिन्न आयामों का वैज्ञानिक एवं सामाजिक दृष्टिकोण से अध्ययन करना था।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जी.बी. पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, गढ़वाल प्रादेशिक केंद्र के निदेशक डॉ. के. चन्द्रशेखर ने प्रतिभागियों और आयोजकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम पर्वतीय क्षेत्रों की जमीनी समस्याओं को समझने तथा उनके वैज्ञानिक समाधान विकसित करने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों द्वारा किए गए अध्ययन को विस्तृत रिपोर्ट के रूप में संकलित करने का सुझाव दिया, जिससे भविष्य की नीतियों के निर्माण में सहायता मिल सके।

कार्यक्रम निदेशक वरिष्ठ प्रोफेसर मोहन सिंह पंवार ने हिमालयी क्षेत्रों में जल स्रोतों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन एवं बढ़ते मानवीय दबाव के कारण जल स्रोतों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण भविष्य में जल संरक्षण एवं सामुदायिक विकास के लिए प्रभावी मॉडल सिद्ध होंगे और विश्वविद्यालय ऐसे कार्यक्रम आगे भी आयोजित करता रहेगा। इस अवसर पर प्रो. विजय कांत पुरोहित, डॉ. धीरज कुमार शर्मा, डॉ. हसीबुर रहमान एवं डॉ. रंजन कर्माकर भी उपस्थित रहे।

दिल्ली विश्वविद्यालय से एसोसिएट प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. गौरव ने हिम-केयर कार्यक्रम की पिछले पांच वर्षों की यात्रा और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला, वहीं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सिद्धार्थ राणा ने प्रतिभागियों द्वारा एकत्रित निष्कर्षों का सार प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन दोनों ने संयुक्त रूप से किया। अंत में आयोजकों ने सभी विशेषज्ञों, शिक्षकों, सहयोगी संस्थानों, स्थानीय समुदायों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए समारोह का औपचारिक समापन किया।

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