

पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा बने साइबर पुलिसिंग में अव्वल, 303 सिम और 320 IMEI ब्लॉक, धनराशि वापसी दर एक माह में लगभग दोगुनी
हल्द्वानी । पुलिस महानिरीक्षक कुमायूं परिक्षेत्र निवेदिता कुकरेती ने सोमवार को हल्द्वानी में आयोजित प्रेस वार्ता में पुलिस आधुनिकीकरण, सीसीटीएनएस पोर्टल तथा साइबर सुरक्षा से जुड़ी ऑनलाइन समीक्षा की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि 1 जनवरी से 20 जुलाई 2026 तक सीसीटीएनएस पोर्टल के माध्यम से कुमायूं परिक्षेत्र में कुल 19,619 ऑनलाइन सम्मन प्राप्त हुए, जिनमें से 50 प्रतिशत सम्मनों की तामील सुनिश्चित की गई।
शिकायत निस्तारण के मामले में पिथौरागढ़ ने 91 प्रतिशत तथा अल्मोड़ा ने 82.59 प्रतिशत दर के साथ बेहतरीन प्रदर्शन किया। साइबर धोखाधड़ी की विवेचना के दौरान पीड़ितों को अब तक 58.14 लाख रुपये से अधिक की धनराशि वापस कराई जा चुकी है। सिर्फ एक माह के भीतर धनराशि वापसी का प्रतिशत 24.04 से बढ़कर 40.64 हो गया, वहीं पीड़ितों के अनुरोधों पर की गई कार्यवाही 220 से बढ़कर 1,084 तक पहुंच गई। इस श्रेणी में पिथौरागढ़ ने 70.5 प्रतिशत धनराशि वापसी के साथ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज कराया।
समीक्षा में यह भी सामने आया कि साइबर अपराध में इस्तेमाल हो रहीं 1,268 संदिग्ध लोकेशन चिन्हित की गईं तथा 303 सिम कार्ड और 320 IMEI नंबर ब्लॉक किए गए। वित्तीय धोखाधड़ी पर नियंत्रण के लिए 240 संदिग्ध म्यूल अकाउंट का सत्यापन किया गया, जिसके आधार पर 32 एफआईआर दर्ज की गई हैं। नागरिकों को थाने आए बिना त्वरित न्याय दिलाने के लिए e-Zero FIR और Link FIR के जरिये 190 शिकायतें दर्ज की गईं।
अंतर्राज्यीय समन्वय के मोर्चे पर कुमायूं रेंज ने अन्य राज्यों को भेजे गए 8,120 सहायता अनुरोधों में से 79.79 प्रतिशत का निस्तारण कराया, जबकि अन्य राज्यों से प्राप्त 2,746 अनुरोधों में से करीब 97 प्रतिशत का समयबद्ध निपटारा किया गया। इसमें भी अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ का प्रदर्शन क्रमशः 86.9 और 84.6 प्रतिशत के साथ सबसे बेहतर रहा। इसके अलावा 172 साइबर अपराधियों की प्रोफाइल राष्ट्रीय पोर्टल पर अपलोड की गई, जिनमें 78 अभियुक्त अंतर्राज्यीय गिरोहों से जुड़े पाए गए।
Cyber Slavery अभियान के तहत विदेशों या अन्य स्थानों से लौटे 35 पीड़ितों में से 29 का सत्यापन कर आवश्यक कार्यवाही की गई। बाल ऑनलाइन सुरक्षा के मामलों में प्राप्त 279 शिकायतों में से 220 का निस्तारण किया गया तथा 14 मामलों में आपत्तिजनक ऑनलाइन सामग्री हटवाई गई। क्षमता विकास की दिशा में रेंज के 6,259 पुलिस कार्मिकों यानी करीब 97 प्रतिशत ने साइबर प्रशिक्षण हेतु पंजीकरण कराया, जिनमें से अब तक 12,170 प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र जारी किए जा चुके हैं।
जन-जागरूकता अभियान के तहत 1,514 विद्यालयों, महाविद्यालयों व संस्थानों तथा 1,349 शिविरों के माध्यम से साइबर सुरक्षा का प्रचार-प्रसार किया गया। इसके साथ ही 3,253 सार्वजनिक स्थानों और 8,588 वरिष्ठ नागरिकों तक सीधी पहुंच बनाई गई तथा 7,787 जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित हुए। सोशल मीडिया अभियानों को करीब 3.42 करोड़ व्यूज प्राप्त हुए।
आईजी निवेदिता कुकरेती ने कहा कि डिजिटल पुलिसिंग, त्वरित शिकायत निस्तारण और साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण आधुनिक पुलिस व्यवस्था की आधारशिला हैं। उन्होंने सभी जनपद प्रभारियों को निर्देश दिए कि सीसीटीएनएस एवं साइबर पोर्टलों पर हर शिकायत का समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और संवेदनशील निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने CIAR के तहत अन्य राज्यों से प्राप्त लगभग 97 प्रतिशत अनुरोधों के समयबद्ध निस्तारण को उत्कृष्ट उपलब्धि बताते हुए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना की तथा भविष्य में भी तकनीक आधारित, पारदर्शी और जनोन्मुख पुलिसिंग को और प्रभावी बनाने पर बल दिया।

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