
देहरादून। उत्तराखंड में दलित समाज के खिलाफ लगातार बढ़ती हिंसा, उत्पीड़न और मानवीय गरिमा के हनन को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष मदन लाल ने रविवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में आयोजित एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक शिथिलता पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि क्या यह 21वीं सदी का भारत है, जहाँ आज भी एक दलित युवक को सरेआम जूते की माला पहनाकर घुमाया जाता है? उन्होंने कहा कि देवभूमि का ताना-बाना आज जातिगत कट्टरता से तार-तार हो रहा है, जो कि बेहद भयावह और चिंताजनक है।
मदन लाल ने हालिया घटनाओं का ब्यौरा देते हुए कहा कि बीते 8 जून 2026 को टिहरी जनपद के देवल गांव निवासी दलित युवक केतन लाल की लोहे की कीलें दागते हुए निर्मम हत्या कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना से साबित होता है कि धामी सरकार में उत्तराखंड के भीतर दलितों के प्रति नफरत की राजनीति किस कदर हावी हो चुकी है। यह न केवल एक जघन्य हत्या है, बल्कि पूरे दलित समाज को लक्षित करके किया गया एक घृणित अपराध है। उन्होंने आगे कहा कि यदि प्रदेश सरकार ने पूर्व में ऐसी घटनाओं पर कठोर कार्रवाई की होती, तो 12 जून को मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र चम्पावत में एक और दलित युवक को जूते की माला पहनाकर सार्वजनिक रूप से अपमानित करने का दुस्साहस नहीं किया जाता। यह घटना न केवल उस युवक का, बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता का उन्मूलन) का खुला उल्लंघन और पूरे समाज की गरिमा पर करारा प्रहार है।
पत्रकार वार्ता के दौरान मदन लाल ने पूर्व की घटनाओं को याद दिलाते हुए कहा कि वर्ष 2019 में टिहरी जनपद में एक दलित युवक की महज इसलिए हत्या कर दी थी क्योंकि उसने कुर्सी पर बैठकर खाना खाने का साहस किया था। इसी तरह वर्ष 2021 में चम्पावत जिले में ही एक दलित युवक को सवर्णों की बारात में अपने हाथ से खाना निकालने के ‘गुनाह’ में मौत के घाट उतार दिया गया था। चम्पावत के ही एक स्कूल में सवर्ण बच्चों द्वारा दलित महिला के हाथ से बना मिड-डे मील खाने से इनकार करना इसी गहरी बैठी जातिगत मानसिकता का परिचायक है।
संविधान का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत का संविधान हमें एक सभ्य समाज की गारंटी देता है, जहाँ अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (गरिमा के साथ जीने का अधिकार) प्रत्येक नागरिक के मौलिक अधिकार हैं। दलित समाज के व्यक्ति को जूते की माला पहनाना या जातिसूचक टिप्पणियाँ करना इन संवैधानिक अधिकारों की हत्या है। अनुच्छेद 46 के तहत राज्य सरकार का यह कर्तव्य है कि वह अनुसूचित जाति और जनजाति को सामाजिक अन्याय और शोषण से बचाए, परंतु उत्तराखंड की भाजपा सरकार इस पर या तो पूरी तरह मौन है या फिर महज कागजी खानापूर्ति करती दिखाई दे रही है।
कांग्रेस पार्टी ने चेतावनी देते हुए टिहरी और चम्पावत की घटनाओं के दोषियों के साथ-साथ लापरवाह और जिम्मेदार पुलिस कर्मियों के खिलाफ भी तत्काल कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। मदन लाल ने कहा कि यदि दलित समाज पर हो रहे अत्याचारों को तुरंत नहीं रोका गया, तो कांग्रेस इसके खिलाफ एक उग्र प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ेगी और पीड़ितों को न्याय मिलने तक अपनी आवाज मुखर रखेगी।
इसी विरोध के क्रम में, प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग द्वारा दिनांक 15 जून 2026 को प्रातः 10:30 बजे से देहरादून के घंटाघर स्थित बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की मूर्ति के समीप एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया जाएगा। इस पत्रकार वार्ता में अनुसूचित विभाग देहरादून के महानगर अध्यक्ष करण घाघट, प्रदेश महामंत्री संजय गौतम, धर्मपाल घाघट और प्रदेश उपाध्यक्ष नोहर सिंह समेत कई वरिष्ठ पदाधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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