
हल्द्वानी(आरएनएस)। भारतीय जीवन बीमा निगम के काठगोदाम स्थित कार्यालय में मंगलवार को कर्मचारियों ने भोजन अवकाश के दौरान आक्रामक रवैया अपनाते हुए 100% एफडीआई प्रस्ताव का विरोध किया। यह विरोध प्रदर्शन यह ऑल इंडिया इंश्योरेंस एम्प्लॉयीज एसोसिएशन (एआईआईईए) के आह्वान पर आयोजित गेट मीटिंग के तहत किया गया। जिसमें बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश के बढ़ते प्रभाव को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई। मंडलीय उपाध्यक्ष पंकज त्रिपाठी ने कहा कि जब बीमा क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोला गया, तब एफडीआई सीमा 26% रखी गई थी। धीरे-धीरे इसे बढ़ाकर 74% कर दिया गया। अब सरकार इसे 100% करने की योजना बना रही है, जो घरेलू पूंजी और बचतों के लिए खतरनाक साबित होगा। उन्होंने कहा कि भारत के बीमा क्षेत्र को विदेशी निवेश की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि पहले से ही यह बहुराष्ट्रीय कंपनियों के गठजोड़ एवं विशाल वित्तीय घरानों से संचालित हो रहा है। महामंत्री डीके पांडे ने चेतावनी देते हुए कहा कि, यदि प्रस्तावित विधेयक सदन में पेश हुआ, तो समस्त बीमा कर्मी देशव्यापी हड़ताल कर विरोध प्रकट करेंगे। उन्होंने कहा कि यह नीति न सिर्फ बीमा क्षेत्र को विदेशी नियंत्रण में धकेलेगी, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा और बचत को भी खतरे में डाल देगी।
जेपी पंत, अशोक कश्यप, हिमांशु चौधरी आदि ने भी इस मुद्दे पर अपने विचार साझा किए। सरकार से अपील की कि वह लोगों की बचत के साथ खेलना बंद करे। एलआईसी कर्मचारियों ने कहा, यदि सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो वह आम जनता को भी आंदोलन से जोड़ेंगे और सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरने से भी पीछे नहीं हटेंगे। प्रदर्शन में भानु प्रकाश उपाध्याय, हेमंत कुमार, विजय सिंह अधिकारी, रविन्द्र कुमार, महेंद्र सिंह, विनोद गुरुरानी, राकेश कुमार, कमल मेहतोलिया, पंचम सिंह, जेके त्रिपाठी, लीलाधर जोशी, दलीप कुमार और गौरव खाती आदि मौजूद रहे।

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