
ऋषिकल्प आश्रम में हुआ भव्य समारोह, वरिष्ठ पदाधिकारियों ने दिया जनजागरण का संदेश
देहरादून। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के पावन अवसर पर अखिल भारत वर्षीय ब्राह्मण महासभा उत्तराखंड ने ऋषिकल्प आश्रम चंद्रमणि में एक भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया। दोपहर 12:30 बजे आयोजित इस कार्यक्रम में महासभा के पदाधिकारियों ने वरिष्ठ योगाचार्यों को शॉल, माला, पुष्प गुच्छ एवं प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर विशेष रूप से आचार्य योगाचार्य अरुण कुमार जी, सुधीर वर्मा जी, दिनेश भंडारी जी, राजेंद्र कोठियाल (क्षेत्र पंचायत सदस्य) एवं सोनू कुमार को सम्मानित किया गया।
महासभा के प्रदेश प्रवक्ता मनमोहन शर्मा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि योग केवल आसनों का समूह नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। उन्होंने कहा, “हमारे पूर्वजों और ऋषि-मुनियों ने योग की विधाओं को सिखाकर मानव को स्वस्थ जीवन का मार्ग बताया। आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस इसी परंपरा का उत्सव है।”
उन्होंने जनमानस से अपील करते हुए कहा कि केवल एक दिन योग करने से जीवन नहीं बदलता। “जो लोग सच्चा स्वास्थ्य चाहते हैं, उन्हें प्रत्येक दिन योग साधना को अपनी दिनचर्या में शामिल करना होगा।”
आचार्य अरुण कुमार जी ने अपने उद्बोधन में कहा, “योग एक ऐसी विधा है, जिसे सीखने वाला स्वयं भी स्वस्थ रहता है और दूसरों के जीवन को भी सुखमय बना सकता है। प्रत्येक व्यक्ति को योग सीखना चाहिए और दूसरों को भी सिखाना चाहिए।”
लालचंद शर्मा ने कहा कि महासभा प्रत्येक रचनात्मक कार्य में जुटी है, चाहे वह योग का प्रचार हो या धर्म व आयुर्वेद के मार्ग पर जनमानस को चलाने का प्रयास। दिनेश भंडारी व सुधीर वर्मा ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि आयुर्वेद और योग को अपनाकर शरीर को निरोग रखा जा सकता है।
इस अवसर पर पंडित मनमोहन शर्मा, आचार्य अरुण कुमार, लालचंद शर्मा, सुधीर वर्मा, दिनेश भंडारी, राजेंद्र कोठियाल, पीयूष गौड़ (राज्य आंदोलनकारी एवं महानगर अध्यक्ष), सोनू कुमार (क्षेत्र पंचायत सदस्य, तिमली), सुदामा सौरभ गुप्ता, गीता वर्मा, सरिता अग्रवाल, पवन कथूरिया, माहेश्वरी पवार, पुष्पा डंगवाल, कुसुम कुमाई, अरविंद डंगवाल और छोटेलाल गौतम सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं महासभा के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
सभी ने एक स्वर में कहा कि योग ही वह साधना है, जो मानव को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाती है—और यह संकल्प प्रतिदिन निभाना ही सच्चा योग है।

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