

निरंजनी गुट ने 13 में से 9 अखाड़ों के समर्थन का दावा किया, जबकि नया उदासीन अखाड़े में भी विवाद गहरा गया।
हरिद्वार। वर्ष 2027 में प्रस्तावित हरिद्वार महाकुंभ से पहले अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के भीतर चल रहा मतभेद अब खुलकर सामने आने लगा है। परिषद के विभिन्न अखाड़ों के बीच समर्थन और नेतृत्व को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को आयोजित संतों की एक बैठक के बाद श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन के एक धड़े ने निरंजनी गुट के समर्थन की घोषणा की।
इस समर्थन के बाद निरंजनी गुट ने दावा किया कि अब परिषद के 13 में से 9 अखाड़ों का सहयोग उन्हें प्राप्त है, जिससे संगठन में उनका बहुमत और मजबूत हुआ है।
वर्तमान में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद दो प्रमुख गुटों में विभाजित है। एक पक्ष का नेतृत्व निरंजनी अखाड़े से जुड़े महंत रविंद्रपुरी और महंत हरिगिरि कर रहे हैं, जबकि दूसरे गुट का नेतृत्व महानिर्वाणी अखाड़े से जुड़े संतों के हाथों में है।
बैठक के दौरान नया उदासीन अखाड़े के सचिव महंत गणेश दास के नेतृत्व में पहुंचे संतों ने परिषद को समर्थन पत्र सौंपने के साथ कुछ शिकायतें भी दर्ज कराईं। उनका आरोप है कि अखाड़े के कुछ लोग पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन नहीं कर रहे हैं और कुंभ मेले की प्राचीन परंपराओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने इस मामले में उचित कार्रवाई की मांग की।
हालांकि, इन आरोपों का नया उदासीन अखाड़े के मुख्य महंत भगत राम ने खंडन करते हुए कहा कि शिकायत करने वाले लोगों को पहले ही अखाड़े की गतिविधियों से अलग किया जा चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई गलत दावे करेगा तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरिगिरि ने कहा कि मामला अखाड़े की परंपराओं और मर्यादा से जुड़ा है, इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर शासन-प्रशासन और विधि विशेषज्ञों की भी राय ली जाएगी।
वहीं परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी ने कहा कि परिषद का बहुमत उनके साथ है और आगामी हरिद्वार महाकुंभ 2027 में शाही स्नान सहित सभी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन परिषद पूरी एकजुटता के साथ करेगी।

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