

कांग्रेस ने एसआईआर-2026 में फर्जी फॉर्म-7 के खिलाफ मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपा ज्ञापन, 15 सितंबर तक नाम बहाल नहीं किए गए तो सड़क से अदालत तक लड़ेंगे आर-पार की लड़ाई
देहरादून । उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक मनोज रावत के नेतृत्व में पार्टी के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम से मुलाकात कर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर-2026) के तहत मतदाता सूचियों में कथित भारी धांधलियों और विसंगतियों के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया।
रावत ने इस मौके पर कहा कि एसआईआर प्रक्रिया की आड़ में वैध मतदाताओं के नाम साजिशन हटाए जा रहे हैं, जिसे वह लोकतंत्र पर सीधा और जानबूझकर किया गया हमला मानते हैं।
पूर्व विधायक मनोज रावत ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि कुछ अज्ञात, बाहरी और अदृश्य ताकतों द्वारा थोक (बल्क) में फर्जी फॉर्म-7 जमा कराकर मूल निवासियों, वैध मतदाताओं और यहां तक कि वर्तमान विधायकों के नाम भी वोटर लिस्ट से गायब करने की बेहद शर्मनाक और सुनियोजित साजिश रची जा रही है।
रावत ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश करते हुए बताया कि कांग्रेस के डेटा विश्लेषण में एक ही व्यक्ति ने करीब 6,400 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आपत्ति दर्ज कराई है। इसके अलावा करीब 1,200 ऐसे लोग हैं जिन्होंने 10 से अधिक आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
मनोज रावत ने सबूत पेश करते हुए बताया कि कांग्रेस की जमीनी जांच में यह साबित हो चुका है कि जिन लोगों के नाम से आपत्तियां दर्ज हैं, उनमें से कई ने ऐसी कोई शिकायत ही नहीं की थी। कई कथित शिकायतकर्ताओं ने लिखित हलफनामा देकर साफ कर दिया है कि उनके फर्जी हस्ताक्षर और नाम का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।
रावत ने बताया कि चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक कोई भी व्यक्ति अधिकतम 5 आपत्तियां ही दे सकता है। इसके विपरीत, राज्य में एक-एक फर्जी नाम और आईडी से सैकड़ों-हजारों आपत्तियां दर्ज कर पूरी चुनावी निष्पक्षता को बंधक बना लिया गया है।
प्रतिनिधिमंडल ने उधम सिंह नगर जिले में ‘डेमोग्राफिकली/फोटो सिमिलर एंट्रीज’ (डीएसई/पीएसई) प्रक्रिया का डर दिखाकर करीब 1,02,793 मतदाताओं के नामों को संदिग्ध बताकर हटाने की गुप्त साजिश का भी पर्दाफाश किया। रावत ने आरोप लगाया कि इसकी लिखित जानकारी राजनीतिक दलों को तक नहीं दी गई।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखीं:
· फॉर्म-7 की कार्यवाही पर रोक – जब तक इस पूरे फर्जीवाड़े की निष्पक्ष जांच और सत्यापन नहीं हो जाता, तब तक फॉर्म-7 के तहत नाम हटाने की पूरी कार्यवाही को तुरंत सस्पेंड किया जाए।
· सख्त कानूनी नोटिस अनिवार्य – जिन मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश है, उन्हें फॉर्म-13 और 14 के तहत अनिवार्य रूप से व्यक्तिगत रूप से कानूनी नोटिस तामील कराया जाए और बिना सुनवाई के कोई नाम न कटे।
· स्वतंत्र जांच और ऑडिट – सभी विवादित कटौतियों और फर्जी आपत्तियों की किसी स्वतंत्र उच्च स्तरीय एजेंसी से गहन जांच और ऑडिट कराई जाए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि एसआईआर की प्रक्रिया पूरी तरह नियमानुसार संपादित की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जिन जिलों में दावे एवं आपत्तियां अधिक संख्या में प्राप्त हुई हैं, वहां नौ वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को पर्यवेक्षण अधिकारी के रूप में अतिरिक्त तैनाती दी गई है।
मनोज रावत ने साफ चेतावनी दी कि यदि 15 सितंबर 2026 को होने वाले अंतिम प्रकाशन से पहले हर एक फर्जी आपत्ति को निरस्त नहीं किया गया और वैध मतदाताओं के नाम वापस नहीं जोड़े गए, तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी।
उन्होंने कहा, “वोटर लिस्ट से वैध नागरिकों का नाम बिना किसी ठोस आधार के मनमाने ढंग से काटना सीधे तौर पर लोकतंत्र की हत्या है। कांग्रेस ऐसी तानाशाही और प्रशासनिक मिलीभगत को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी”।
रावत ने कहा कि नई दिल्ली में केंद्रीय चुनाव आयोग के बाहर भारी विरोध प्रदर्शन के बाद ही प्रदेश चुनाव आयोग को झुकना पड़ा और उन्होंने बात करने का समय दिया। उन्होंने कहा, “हम इसके खिलाफ सड़क से लेकर अदालत तक आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे और जनता के अधिकारों पर डाका डालने वालों का पर्दाफाश करेंगे”।
प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से प्रदेश महामंत्री संगठन राजेंद्र भंडारी, उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना, सुजाता पॉल, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह, महानगर अध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह गोगी शामिल रहे।

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