
सामान जब्ती और आजीविका पर चोट के खिलाफ उठी आवाज, मानवीय व्यवहार की मांग
देहरादून। शहर की सड़कों पर दिन-रात मेहनत कर अपने परिवार का पेट पालने वाले रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों ने शुक्रवार को नगर निगम की कार्रवाइयों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU) से संबद्ध रेहड़ी-पटरी यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने देहरादून के मेयर से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा और नगर निगम द्वारा फेरीवालों के साथ किए जा रहे व्यवहार पर गहरी चिंता जताई। यूनियन ने मांग की कि मेहनतकश रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को अनावश्यक रूप से परेशान करना बंद किया जाए, उनका सामान न जब्त किया जाए और किसी भी कार्रवाई में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए।
यूनियन ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट कहा कि नगर निगम की कार्रवाइयों के दौरान विक्रेताओं के सामान को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और उनकी आजीविका पर सीधी चोट की जा रही है, जो किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। यूनियन का कहना है कि रेहड़ी-पटरी व्यवसायी शहर की अर्थव्यवस्था की एक अहम कड़ी हैं और आम आदमी को सस्ती दरों पर सामान व सेवाएं मुहैया कराने में इनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन्हें सम्मान के साथ रोजगार करने का पूरा अधिकार है और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह उनके इस अधिकार की रक्षा करे।

यूनियन ने तीन सूत्री मांगों को अपनी लड़ाई का केंद्र बनाते हुए कहा कि रोजगार का अधिकार सुरक्षित हो, उत्पीड़न पूरी तरह बंद हो और सामान की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। प्रतिनिधिमंडल ने मेयर से अपेक्षा जताई कि वे नगर निगम को संवेदनशील रवैया अपनाने के निर्देश दें, ताकि छोटे व्यवसायियों की रोजी-रोटी पर आंच न आए।

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