79 नाली सार्वजनिक भूमि बचाने की लड़ाई तेज, छठे दिन भी अनशन जारी, धरने पर पहुंचे यूकेडी नेता लूशुन टोडरिया

बोले- उत्तराखंड को राजनीतिक प्रयोगशाला नहीं बनने देंगे

हेमकुंड यात्रा विवाद पर सौहार्द बनाए रखने और भड़काऊ राजनीति से बचने की अपील

टिहरी। टिहरी जनपद के सुलियाधर क्षेत्र में रामगांव और बौर गांव की 79 नाली चारागाह एवं सार्वजनिक भूमि को बचाने के लिए चल रहे क्रमिक अनशन का रविवार को छठा दिन रहा। आंदोलन स्थल पर स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने पहुंचकर आंदोलन को अपना समर्थन दिया।

धरने में उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के नेता एवं भूमि एवं डोमिसाइल सेल के प्रमुख लूशुन टोडरिया भी शामिल हुए और आंदोलनकारियों के साथ धरने पर बैठे। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल 79 नाली भूमि का नहीं, बल्कि उत्तराखंड के जल, जंगल, जमीन, ग्राम समाज और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों की रक्षा का आंदोलन है। उन्होंने कहा कि वर्षों से ग्रामीणों और पशुपालकों के उपयोग में रही सार्वजनिक चारागाह भूमि को निजी हाथों में सौंपने के किसी भी प्रयास का पुरजोर विरोध किया जाएगा।

धरने के बाद लूशुन टोडरिया ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से हाल ही में हेमकुंड यात्रा मार्ग पर हुए विवाद पर भी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस मामले को जल्द से जल्द समाप्त किया जाना चाहिए और इसे किसी भी कीमत पर पहाड़ी बनाम पंजाबी या सिख समाज का विवाद नहीं बनाया जाना चाहिए।

टोडरिया ने कहा कि उत्तराखंड सदियों से सामाजिक सद्भाव और धार्मिक सौहार्द की भूमि रहा है। हेमकुंड साहिब यात्रा वर्षों से शांतिपूर्ण ढंग से संचालित होती रही है और हेमकुंड साहिब के समीप स्थित लक्ष्मण मंदिर तथा गुरुद्वारा प्रबंधन के बीच कभी किसी प्रकार का विवाद नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 1984 के दंगों के दौरान भी, जब देश के कई हिस्सों में तनाव का माहौल था, तब भी उत्तराखंड में हेमकुंड यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण रही और किसी भी श्रद्धालु के साथ कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में उनकी लड़ाई जल, जंगल, जमीन, भू-कानून, मूल निवास, बेरोजगारी और शिक्षा जैसे जनसरोकार के मुद्दों पर है, जबकि पंजाब में भी लोग भूमि अधिकारों और किसानों के हितों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में दोनों समाजों के बीच वैमनस्य पैदा करना किसी के हित में नहीं है। उनका कहना था कि यदि कोई किसी समाज के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग करेगा तो स्वाभाविक रूप से प्रतिक्रिया होगी, लेकिन किसी दो पक्षों के विवाद को पूरे समाजों के बीच टकराव का रूप देना गलत है।

लूशुन टोडरिया ने आरोप लगाया कि कुछ यूट्यूब इन्फ्लुएंसर केवल अपनी टीआरपी बढ़ाने के उद्देश्य से इस विवाद को अनावश्यक रूप से तूल दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ राजनीतिक लोग भी इस प्रकरण का लाभ उठाकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “हम उत्तराखंड को किसी भी कीमत पर राजनीतिक प्रयोगशाला नहीं बनने देंगे।”

उन्होंने सरकार से मांग की कि उत्तराखंड आने वाले प्रत्येक पर्यटक से एक शपथ-पत्र (हलफनामा) लिया जाए, जिसमें वह राज्य के कानून, संस्कृति, पर्यावरण और सामाजिक अनुशासन का सम्मान करने तथा उनका पालन करने का संकल्प दे।

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