स्थायी राजधानी गैरसैंण को लेकर आंदोलन तेज, समिति की गूगल मीट में बनी रणनीति

1 फरवरी को रुद्रप्रयाग में धरना-प्रदर्शन का ऐलान

गैरसैंण को राजधानी बनाने से पलायन रुकेगा, रोजगार बढ़ेगा—वक्ताओं का मत

देहरादून। स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति द्वारा गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी बनाए जाने की मांग को लेकर एक महत्वपूर्ण गूगल मीट का आयोजन किया गया। बैठक का संचालन समिति के सक्रिय सदस्य अनिल बहुगुणा ने किया। उन्होंने सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए आंदोलन को और अधिक मजबूती देने के लिए विचार साझा करने का आह्वान किया।
बैठक में बड़ी संख्या में पुराने एवं नए सदस्यों ने भाग लिया। इस दौरान यह निर्णय लिया गया कि समिति का अगला कार्यक्रम 1 फरवरी को रुद्रप्रयाग में धरना-प्रदर्शन के रूप में आयोजित किया जाएगा, जिसका मुख्य एजेंडा केवल एक होगा— “स्थायी राजधानी गैरसैंण”।
बैठक में डा. पार्थ शर्मा ने कहा कि पहाड़ों के समग्र विकास के लिए गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाना अत्यंत आवश्यक है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, पलायन में कमी आएगी तथा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा।
अवधेश शर्मा ने कहा कि हमारा कर्तव्य केवल प्रयत्न करना है और यह प्रयत्न तब तक जारी रहेगा जब तक गैरसैंण उत्तराखंड की स्थायी राजधानी नहीं बन जाती। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जवानी और पानी दोनों ही राज्य के काम नहीं आ पा रहे हैं और अब जनता को अपनी वोट की ताकत से जवाब देना होगा।
राजकिशोर बिष्ट ने सरकार की नीतियों, भ्रष्टाचार, मुनि महाराज डोली विवाद तथा हेलीकॉप्टर सेवाओं से पर्यावरण पर पड़ रहे दुष्प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने इन मुद्दों को आगामी प्रेस कॉन्फ्रेंस और धरना-प्रदर्शन में प्रमुखता से उठाने की बात कही।
राजेन्द्र प्रसाद कंडवाल ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य गठन के 25 वर्षों बाद भी उत्तराखंड को स्थायी राजधानी नहीं मिल पाई। दो राजधानियों का बोझ राज्य पर भारी पड़ रहा है, जबकि गांव लगातार खाली हो रहे हैं।
कुलदीप अग्रवाल ने “जय उत्तराखंड, जय गैरसैंण” के उद्घोष के साथ कहा कि अब और इंतजार नहीं किया जा सकता। इस बार हर हाल में स्थायी राजधानी गैरसैंण चाहिए।
दान सिंह मिंगवाल ने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली पर तीखा हमला करते हुए कहा कि आम आदमी की कहीं सुनवाई नहीं है।
सुनील जेदली ने व्यंग्यात्मक अंदाज में सरकार से सवाल उठाए, जबकि रमेश थपलियाल ने कहा कि उनका निरंतर जुड़ाव ही आंदोलनकारियों का उत्साह बढ़ाने के लिए पर्याप्त है।
मुख्य संयोजक विनोद प्रसाद रतूड़ीं ने कहा कि आगामी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दीक्षित आयोग की रिपोर्ट, पर्यावरण और अन्य उपेक्षित मुद्दों को भी प्रमुखता से रखा जाएगा।
बैठक के अंत में अनिल बहुगुणा ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने का लक्ष्य प्राप्त किया जाएगा।

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