उत्तराखण्ड को मिली पहली रोबोटिक लैब, श्री गुरु राम राय मेडिकल कॉलेज में हुआ शुभारंभ

देहरादून, श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज (एसजीआरआरआईएमएण्डएचएस) के जैव रसायन विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए उत्तराखण्ड की पहली रोबोटिक पूर्ण स्वचालित प्रयोगशाला एवं उत्कृष्टता केन्द्र का शुभारंभ किया। यह अत्याधुनिक प्रयोगशाला श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल, पटेल नगर स्थित केन्द्रीय जैव रसायन प्रयोगशाला में स्थापित की गई है।

इस अवसर पर ‘‘सिक्स सिग्मा और पूर्ण प्रयोगशाला स्वचालन के लाभ’’ विषय पर निरंतर चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। अस्पताल के माननीय चेयरमैन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने इस उपलब्धि पर चिकित्सकों एवं पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

उद्घाटन समारोह में श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डाॅ.) के. प्रतापन, एसजीआरआरआईएमएण्डएचएस के प्राचार्य डाॅ. उत्कर्ष शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. अनिल मलिक, चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. गौरव रतूड़ी, चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. वीरेन्द्र वर्मा, जैव रसायन विभागाध्यक्ष डाॅ. तारिक मसूद, प्रोफेसर डाॅ. राणा उसमानी तथा प्रयोगशाला प्रभारी डाॅ. अंशुल एम. काला ने रिबन व केक काटकर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुत वैज्ञानिक विचार-विमर्श रहा। मेदांता अस्पताल की कंसल्टेंट बायोकैमिस्ट्री डॉ. भावना बैस ने रोबोटिक टोटल लैब ऑटोमेशन के मरीज देखभाल में लाभों पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि आधुनिक डायग्नोस्टिक्स में यह तकनीक कार्यक्षमता और सटीकता को बढ़ाने के साथ-साथ जांच रिपोर्ट मिलने के समय में उल्लेखनीय कमी लाती है, जिससे मरीजों को समय पर और विश्वसनीय उपचार मिल पाता है।

इसके उपरांत डाॅ. तारिक मसूद ने प्रयोगशाला चिकित्सा में ‘सिक्स सिग्मा’ की भूमिका तथा गुणवत्ता और नैदानिक परिणामों में सुधार पर सारगर्भित प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में इंटरैक्टिव पैनल चर्चा एवं प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन भी किया गया, जिससे चिकित्सकों, प्रयोगशाला विशेषज्ञों और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े हितधारकों के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा मिला।

विशेषज्ञों ने इसे राज्य में मरीजों को विश्वस्तरीय जांच सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। रोबोटिक पूर्ण स्वचालित प्रयोगशाला के माध्यम से नमूनों की डिजिटल ट्रैकिंग, मानवीय त्रुटियों में कमी, तेज टर्नअराउंड टाइम तथा उच्च गुणवत्ता वाले नैदानिक परिणाम सुनिश्चित होंगे। इससे विशेष रूप से आईसीयू एवं आपातकालीन मरीजों के उपचार में तेजी आएगी और गंभीर बीमारियों का समय पर एवं सटीक निदान संभव हो सकेगा।

सिक्स सिग्मा आधारित गुणवत्ता प्रणाली जांच प्रक्रियाओं में त्रुटियों को न्यूनतम कर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल उत्तराखण्ड में आधुनिक डायग्नोस्टिक सेवाओं और मरीज देखभाल की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगी।

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