लखनऊ 11 फरवरी (आरएनएस)। उत्तर प्रदेश के ग्राम्य विकास विभाग द्वारा महिला सशक्तिकरण की दिशा में किए गए प्रयासों ने नए आयाम स्थापित किए हैं। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) द्वारा चलाए जा रहे विद्युत सखी कार्यक्रम ने न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त किया है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत बिल कलेक्शन की प्रक्रिया को भी सुचारू बनाया है।
इस कार्यक्रम के तहत महिलाओं को रोजगार देने के साथ-साथ उन्हें समाज में अपनी पहचान बनाने का अवसर भी मिल रहा है। विद्युत सखियों ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में अब तक 840 करोड़ रुपये का विद्युत बिल कलेक्शन किया है, और यह अनुमान है कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक यह आंकड़ा 1000 करोड़ रुपये से भी अधिक हो जाएगा। पिछले वर्षों के मुकाबले इस वर्ष में विद्युत बिल कलेक्शन में 120 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो इस कार्यक्रम की सफलता को दर्शाता है।यूपीएसआरएलएम द्वारा यूपी पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) और आईसीआईसीआई बैंक के सहयोग से यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और ग्रामीण क्षेत्रों में डिस्कॉम की विद्युत बिल कलेक्शन क्षमता को बेहतर बनाना है।इस वर्ष, 438 विद्युत सखियों ने ‘लखपति दीदी’ बनने में सफलता प्राप्त की है और 10.5 करोड़ रुपये कमीशन के रूप में प्राप्त किए हैं। ओटीएस योजना के तहत दिसम्बर 2024 और जनवरी 2025 में 303 करोड़ रुपये का विद्युत बिल कलेक्शन किया गया, जिससे विद्युत सखियों को कुल 3.5 करोड़ रुपये कमीशन मिला।विद्युत सखी कार्यक्रम के तहत 13,088 सक्रिय सखियां और 28,427 रजिस्टर्ड सखियां हैं। हाल ही में, 13,500 नई विद्युत सखियों को प्रशिक्षित किया गया है, ताकि कार्यक्रम की प्रगति को तेज़ी से बढ़ाया जा सके और ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ता कवरेज में सुधार लाया जा सके।इस कार्यक्रम के माध्यम से महिलाएं न केवल विद्युत उपभोक्ताओं की मदद कर रही हैं, बल्कि वे सामाजिक बदलाव की वाहक भी बन रही हैं। विद्युत सखियों ने अपने कार्यों से यह सिद्ध कर दिया है कि वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं और राज्य के राजस्व में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। यह कार्यक्रम एक उदाहरण बनकर उभरा है कि कैसे समावेशी नीतियां और जमीनी प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। विद्युत सखियां अब केवल परिवार का खर्चा नहीं संभाल रही हैं, बल्कि वे समाज में एक सम्मानजनक स्थान बना रही हैं और अपने परिवार को एक बेहतर जीवन देने में सक्षम हो रही हैं।
विद्युत सखी कार्यक्रम : महिला सशक्तीकरण और आर्थिक समृद्धि की दिशा में एक मील का पत्थर
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