

संयुक्त ट्रेड यूनियन व किसान मोर्चे ने किया आह्वान, सिटी मजिस्ट्रेट ने मौके पर ही सभी को किया रिहा
देहरादून। केन्द्र सरकार की मजदूर-विरोधी एवं किसान-विरोधी नीतियों के खिलाफ उत्तराखंड की राजधानी में बुधवार को बड़ा आंदोलन हुआ। उत्तराखंड संयुक्त ट्रेड यूनियंस संघर्ष समिति व संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वावधान में आयोजित इस ऐतिहासिक जेल भरो आंदोलन में सीटू, एटक, इंटक एवं उत्तराखंड किसान सभा से जुड़े सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने गांधी पार्क में एकत्र होकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने राजपुर रोड, घंटाघर, गांधी रोड व तहसील चौक से होते हुए जिलाधिकारी कार्यालय तक भारी प्रदर्शन किया, जहां 710 आंदोलनकारियों ने शांतिपूर्वक गिरफ्तारी दी। सिटी मजिस्ट्रेट ने सभी को मौके पर ही गिरफ्तार कर, तुरंत बिना शर्त रिहा करने का आदेश दिया। इस अवसर पर महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन भी सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा गया।
गांधी पार्क में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने मोदी सरकार पर चार श्रम संहिताओं के जरिए मजदूरों का शोषण बढ़ाने का आरोप लगाया। मांग पत्र में प्रमुख रूप से सभी श्रम संहिताओं को वापस लेने, सभी फसलों पर सी2+50% फार्मूले पर एमएसपी सुनिश्चित करने, विद्युत संशोधन विधेयक 2025 एवं शांति अधिनियम वापस लेने, ठेका व पीस रेट श्रमिकों के लिए 42,000 रुपये न्यूनतम मजदूरी लागू करने, मनरेगा को 200 दिनों के साथ 700 रुपये प्रतिदिन बहाल करने, बीवीजी ग्राम अधिनियम समाप्त करने की मांग की गई। इसके अलावा सभी श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा, ओपीएस (OPS) की बहाली, पीएसयू का निजीकरण रोकने, शिक्षा एवं स्वास्थ्य का बजट बढ़ाने तथा अतिधनियों पर धन कर लगाने सहित 11 प्रमुख मांगें शामिल रहीं। वक्ताओं ने आईएलओ (ILO) के गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों पर पारित सम्मेलन को लागू करने की भी मांग उठाई।

इस महाआंदोलन में सीटू के जिला महामंत्री लेखराज, एटक के प्रांतीय महामंत्री अशोक शर्मा, इंटक के जिला अध्यक्ष अनिल कुमार, अखिल भारतीय किसान सभा के प्रांतीय अध्यक्ष शिव प्रसाद देवली, सीटू जिला अध्यक्ष एस.एस. नेगी, सी2 के प्रांत महामंत्री राजेंद्र सिंह नेगी, साथ ही आशा यूनियन, आंगनवाड़ी यूनियन, निर्माण श्रमिक यूनियन, रेहड़ी-पटरी यूनियन के पदाधिकारियों ने नेतृत्व किया। बस्ती बचाओ आंदोलन के संयोजक अनन्त आकाश, वरिष्ठ आंदोलनकारी बालेश बबानिया सहित सुशील, भगवन्त पयाल, याकूब अली, बबीता अनन्त, रामसिंह भण्डारी, सुनीता चौहान, मंजू थापा सहित सैकड़ों कार्यकर्ता व नेता मौजूद रहे। यह आंदोलन फिलहाल शांतिपूर्ण समाप्त हो गया, लेकिन संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आगामी दिनों में और तीखे कदम उठाए जाएंगे।

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