
देहरादून। एक तरफ कैंसर की बीमारी, दूसरी तरफ विधवा होने का दर्द और ऊपर से बच्चों की शिक्षा छूटने का डर — डोईवाला निवासी सुनीता कलवार की यह व्यथा जब जिलाधिकारी सविन बंसल के सामने आई तो प्रशासन ने फौरन मानवीय संवेदना का परिचय दिया। जिलाधिकारी के निर्देश पर रायफल क्लब फंड से सुनीता को 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई, बेटे का स्कूल में दाखिला कराया गया और बेटी की बाधित पढ़ाई को ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ के जरिए पुनः शुरू कराया गया।
सुनीता कलवार स्वयं जिलाधिकारी के समक्ष उपस्थित हुई थीं और अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया था कि परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय है कि एक साथ इलाज और बच्चों की पढ़ाई जारी रखना संभव नहीं रह गया था। 11 जुलाई 2024 को जौलीग्रांट अस्पताल में उनका कैंसर का ऑपरेशन हुआ था और तब से उनका उपचार निरंतर जारी है। ऐसे में घर चलाना, दवाइयां लेना और बच्चों की फीस भरना — तीनों एक साथ उनके बस से बाहर हो चुके थे।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए तत्काल आवश्यक निर्देश जारी किए। प्रशासन ने न केवल आर्थिक सहायता दी बल्कि दोनों बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए। बेटे का विद्यालय में दाखिला सुनिश्चित किया गया जबकि बेटी को जिला प्रशासन की महत्वाकांक्षी योजना ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ के अंतर्गत पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया। जिला प्रशासन द्वारा उनके उपचार एवं पारिवारिक सहयोग के लिए लगातार समन्वित प्रयास भी किए जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जिलाधिकारी सविन बंसल के नेतृत्व में देहरादून जिला प्रशासन ने पिछले कुछ वर्षों में उपचार, शिक्षा, आर्थिक सहायता, रोजगार, बैंक ऋण राहत तथा विद्युत एवं जल बकाया निस्तारण जैसे विषयों पर सैकड़ों जरूरतमंद परिवारों के प्रकरणों का मानवीय तरीके से निपटारा किया है। ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ के जरिए सैकड़ों असहाय बालिकाओं की बाधित शिक्षा को पुनर्जीवित कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जा चुका है। सुनीता कलवार का प्रकरण इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब प्रशासन संवेदनशील हो तो फाइलें नहीं, जिंदगियां बदलती हैं।


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