एक साधु प्रतिदिन घाट के किनारे बैठकर जोर-जोर से चिल्लाया करता था, “जो चाहोगे, सो पाओगे! जो चाहोगे, सो पाओगे!” वहाँ से गुजरने वाले लोग उसकी बातों को अनसुना कर देते थे, उसे पागल समझते थे। लेकिन वह साधु न रुका, न थका।
एक दिन, एक युवक वहाँ से गुजरा और उसकी आवाज़ कानों में पड़ी। उत्सुकतावश वह साधु के पास गया और पूछा, “महाराज, क्या सच में मैं जो चाहूँ, वह पा सकता हूँ?”
साधु मुस्कुराया और बोला, “हाँ, लेकिन पहले बताओ, तुम्हारी सबसे बड़ी इच्छा क्या है?”
युवक ने आत्मविश्वास से उत्तर दिया, “मैं दुनिया का सबसे बड़ा हीरा व्यापारी बनना चाहता हूँ।”
साधु ने उसकी ओर देखा और गंभीरता से बोला, “मैं तुम्हें दो अनमोल चीजें देता हूँ, जिनसे तुम जितने चाहो उतने हीरे-मोती कमा सकते हो।”
फिर उसने युवक की एक हथेली पकड़कर कहा, “यह दुनिया का सबसे बहुमूल्य हीरा है—’समय’। इसे कभी व्यर्थ मत गँवाना। इसका सही उपयोग करोगे, तो तुम्हारी झोली हीरों से भर जाएगी।”
इसके बाद, उसने युवक की दूसरी हथेली थामी और कहा, “यह दुनिया का सबसे कीमती मोती है—’धैर्य’। जब कभी लगे कि मेहनत का फल नहीं मिल रहा, तो इस मोती को संभाल लेना। यह तुम्हें सफलता की ओर ले जाएगा।”
युवक ने साधु की बातों को गंभीरता से लिया और संकल्प किया कि वह कभी अपना समय व्यर्थ नहीं करेगा और हर परिस्थिति में धैर्य बनाए रखेगा। उसने एक प्रसिद्ध हीरा व्यापारी के यहाँ काम शुरू किया और पूरी ईमानदारी व मेहनत से अपने कौशल को निखारा। सालों की साधना और धैर्य के बल पर वह स्वयं भी एक दिन हीरों का बहुत बड़ा व्यापारी बन गया।
संदेश:
समय और धैर्य वे दो रत्न हैं, जिनके सहारे कोई भी व्यक्ति अपने सपनों को साकार कर सकता है। इसलिए अपने समय का सदुपयोग करें और सफलता तक पहुँचने के लिए धैर्य बनाए रखें।
डिस्क्लेमर
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