उत्तरकाशी(आरएनएस)। उत्तरकाशी के धराली में आई विनाशकारी आपदा को अब एक हफ्ते होने को हैं, सेना, एनडीएआरएफ, एसडीआरएफ समेत तमाम बचाव दल उस मलबे में दफ्न जिंदगियों को खोज रहा है। परिस्थिति विपरीत होने के चलते इसमें समय भी लग रहा है। इस बीच इंडियन आर्मी ने उस प्रलय के बाद मलबे में दफ्न लोगों को खोजने का नया तरीका निकाला है। सेना इसके लिए एक खास तरह के रडार की मदद लेगी जिसके बाद लोगों को ढूंढ़ना आसान हो जाएगा। बादल फटने के बाद धाराली-हर्षिल इलाके में चल रहे तलाशी अभियान पर ब्रिगेडियर एम.एस. ढिल्लों ने कहा कि 5 अगस्त से ही सेना, राज्य सरकार और अन्य एजेंसियां बचाव और राहत कार्यों में लगातार लगी हुई हैं। आज का हमारा मुख्य ध्यान उन लोगों को खोजने पर है जो बादल फटने के बाद मलबे में दब गए हैं। हम ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार का उपयोग कर रहे हैं, जो जमीन के नीचे दबे हुए इंसानों या धातु की वस्तुओं की पहचान करता है। हमने सैटेलाइट कम्युनिकेशन भी स्थापित किया है। एम.एस. ढिल्लों ने कहा, “हम उन जगहों की जांच कर रहे हैं जहां होमस्टे बने थे। एक मेडिकल कैंप लगाया गया है और क्योंकि अभी तक मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं है, इसलिए नागरिकों को बात करने के लिए एक हब भी स्थापित किया गया है।”
धराली और हर्षिल में हाल ही में आई आपदा से प्रभावित लोगों की मदद के लिए जिला प्रशासन लगातार काम कर रहा है। रविवार को सुबह 11 बजे तक, मातली हेलीपैड पर 20 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया और प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें उनके गंतव्य स्थान पर भेज दिया गया। प्रशासन ने बताया कि धराली और हर्षिल के आपदा प्रभावित इलाकों में जरूरी सामान पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करा दिया गया है। हर घर तक खाने-पीने की चीज़ें और अन्य राहत सामग्री पहुंचाने का काम शुरू हो गया है। इसी बीच, बादल फटने के बाद धराली-हर्षिल इलाके में तलाशी और बचाव अभियान अभी भी जारी है।
धराली आपदा : मलबे में दबे लोगों को नई तकनीक से खोज निकालेगी सेना
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