बाउंड्रीवाल के मलबे में दबा भ्रष्टाचार
बल्दीराय/सुल्तानपुर (आरएनएस ) राजकीय इंटर कॉलेज पिपरी में प्रोजेक्ट अलंकार योजना के अंतर्गत बनाई जा रही 1 करोड़ 63 लाख 80 हजार रुपये की बाउंड्रीवाल पहली ही बरसात में ढह गई। 1850 रनिंग मीटर लंबी यह दीवार सरकारी खजाने पर भारी बोझ डालने के बाद मलबे में तब्दील हो गई, लेकिन असली सवाल यह है कि इसके पीछे किसका पेट भरा गया।
निर्माण में खुलेआम घटिया ईंट, सीमेंट और मौरंग का इस्तेमाल किया गया। मानक दरकिनार कर भ्रष्टाचार की मिली-जुली परतें इस दीवार में ऐसे गूंथ दी गईं कि पहली बरसात ने ही पूरी पोल खोल दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिम्मेदार अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत से करोड़ों की सरकारी राशि को लूट का जरिया बना लिया गया। विद्यालय की सुरक्षा और छात्रों के हित के नाम पर शुरू हुआ यह निर्माण, भ्रष्टाचार के गर्त में समा गया। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता जांच महज कागजों में की गई। मौके पर किसी ने निगरानी तक नहीं की। जिससे इस बड़े भ्रष्टाचार को बल मिला। गांव के दीपक सिंह, रघुनाथ सिंह, आशीष सिंह आदि ने मांग की है कि जिलाधिकारी सुल्तानपुर, उच्च स्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों और ठेकेदार को बर्खास्त कर जेल भेजें। यह मामला सिर्फ एक बाउंड्रीवाल का नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं की जड़ में बैठे भ्रष्टाचार का खुला प्रमाण है। अगर ऐसी लूट पर नकेल नहीं कसी गई, तो आने वाली योजनाओं का भी यही हश्र होगा।
विनियमित क्षेत्र कार्यालय में भ्रष्टाचार की दीवारें ऊंची, नियमों की नींव हुई खोखली
सुल्तानपुर। जनपद में नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं विनियमित क्षेत्र शहरी क्षेत्र में बिना मानचित्र स्वीकृत के कई निर्माण किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि इन इमारतों के खिलाफ लगातार शिकायतें दर्ज कराई गई लेकिन कार्यवाही के नाम पर सब शून्य है इससे साफ जाहिर होता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति की यहां खुल कर अनदेखी हो रही है।
धारा 10 की नोटिस तो जैसे एक औपचारिकता बन कर रह गई है इन इमारतों के मालिक न तो नोटिस से डरते हैं न ही कानून की परवाह करते है इससे साफ संकेत मिलता है कि कही न कही नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारी भी इस पूरे भ्रष्ट तंत्र में शामिल हैं। यह पहली बार नहीं है जब धारा 10 की नोटिस जारी होने के बाद भी निर्माण कार्य जारी रहने की खबरें सामने आई हैं पहले भी ऐसी अनेक खबरें मीडिया की सुर्खियां बन चुकी हैं लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी कड़ी में एक ताजा मामला पयागीपुर चौराहे के निकट ट्रांसपोर्ट नगर में नगर पालिका सुल्तानपुर द्वारा व्यवसायिक दुकानों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है इस निर्माण के लिए न तो कोई मानचित्र स्वीकृत हुआ है न ही कोई वैध अनुमति ली गई है। अवर अभियंता विनियमित क्षेत्र उमेश चन्द्र का कहना है कि इस अवैध निर्माण के संबंध में उपजिलाधिकारी सदर विपिन द्विवेदी के आदेश पर अधिशासी अधिकारी नगर पालिका को धारा 10 की नोटिस भेजा गया साथ ही कोतवाली पुलिस को भी निर्माण कार्य रोके जाने के लिए उपजिलाधिकारी सदर द्वारा लिखित रूप से सूचना भेजी जा चुकी है लेकिन सूत्रों का दावा है कि इन अधिकारियों के बीच अंदरखाने समझौता हो चुका है सवाल उठता है कि अगर अधिकारी वाकई अनभिज्ञ हैं तो निर्माण खुले आम कैसे जारी है और यदि इन अधिकारियों को जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।
बरसात ने खोली करोड़ों के घोटाले की पोल
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