देश के पहाड़ों पर बसाहट की आधुनिक तकनीकी कौशल की आवश्यकता

अजय दीक्षित
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, लद्दाख, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में हिमालय की गोद में बसे पहाड़ों पर दिनों दिन आबादी और पर्यटकों होटलों,सड़कों का बेहिसाब बोझ बढ़ता चला जा रहा है, इसके चलते भूस्खलन
, बादल फटने भारी बारिश से उमड़े सैलाब से त्रासदी दर त्रासदी हो रही है और अब भारत सरकार को माउंटेन इंजीनियरिंग के विकसित कौशल को कड़ाई से लागू करने की आवश्यकता है।विगत दिवस ही केदारनाथ के नजदीक धावली नामक में भारी बारिश से उमड़े सैलाब में 150 से अधिक लोगों की मौत हो गई और तमाम घर,होटल,सेना का कैंप माचिस की तीलियों की तरह बिखर गया है।2013 में केदारनाथ धाम में सैलाब आया था तब हजारों लोगों मौत के मुंह में समा गए।सुनते हैं कि नैनीताल में भी बादल फटने से सैलाब आया है।दूसरी ओर भारत सरकार इन दुर्गम क्षेत्रों में सड़क, परियोजना पर कार्य कर रही है।
ऋषिकेश से बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमनोत्री, केदारनाथ धाम को फोर लेन सड़क परियोजना चल रही है।पूरे गढ़वाल क्षेत्र में बड़ी बड़ी मशीनों से कार्य चल रहा है। भारत सरकार ने पर्यावरण विशेषज्ञ की राय को नजरंदाज कर कार्य किया है
ऋषिकेश से रुद्र प्रयाग रेल लाइन पर भी कार्य चल रहा है।
लेकिन त्रासदी भी हो रही हैं। नैनीताल,शिमला, मसूरी,मनाली,कुल्लू, डलहौजी, अल्मोड़ा, रानीखेत, मुक्तेश्वर, बागेश्वर, कसौली, किन्नौर,आदि स्थानों पर करोड़ों की संख्या में पर्यटकों का आना जाना है।एक तरह से पर्यटक हब विकसित हो गया है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश,में होटलों का अंबार लग गया है।इससे पहाड़ों पर बोझ बढ़ गया है। पहाड़ दरकने लगे हैं और भारभरा कर गिर जाते हैं।इसे लैंड स्लाइड्स कहते हैं। रिसर्च एंड सिक्योरिटी इन हिमालियन माउंट के प्रधान अभियंता सरल नेगी कहते हैं कि
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश में नियमों को ताक पर रख कर होटलों, सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है।जबकि चाइना, तिब्बत, जापान में भी ऐसे ही इलाके हैं लेकिन उन्होंने सीमित निर्माण कार्य किया है।
भारत में आबादी के दबाव और बढ़ते धनाढ्य लोगों के कारण पर्यटन पिछले दस सालों में 300 फीसदी तक बढ़ा है और अब निजी वाहनों से लोग सफर करते हैं जिसके चलते जाम की स्थिति उत्पन्न होती है और सरकार सड़कों को फोर लेन बना रही है। दूसरी दृष्टि से देखे तो रोजगार, व्यावसायिक विकास हुआ है परंतु ये विकास ,विनाश भी लेकर आ रहा है। इसलिए सरकार को इन क्षेत्रों में नए स्टेशन
बनाने की आवश्यकता है और यह सुरक्षित भी होना चाहिए।

( लेख में व्यक्त विचार निजी हैं )

ऐसी और भी खबरें पढ़ने के लिए बने रहें merouttarakhand.in के साथ।
Subscribe our Whatsapp Channel
Like Our Facebook & Instagram Page
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments