जगन्नाथ पुरी के अनसुलझे रहस्य

उड़ीसा में पुरी का जगन्नाथ धाम न केवल चार धामों में से एक है, बल्कि इसके साथ कई ऐसे रहस्य जुड़े हैं जिन्हें विज्ञान भी पूरी तरह नहीं समझ पाया है। इनमें मंदिर के ध्वज की दिशा, रसोई का चमत्कार, समुद्र की लहरों का मौन, और भगवान की मूर्तियों का नबकलेबारा जैसे रहस्य शामिल हैं।

पुरी (ओडिशा) में स्थित श्री जगन्नाथ धाम को चार प्रमुख धामों में से एक माना गया है – बद्रीनाथ, द्वारका, रामेश्वरम् और पुरी। यह मंदिर न केवल भगवान विष्णु यानि भगवान् जगन्नाथ का निवासस्थान है, बल्कि यह स्थान शक्ति, रहस्य और चमत्कार काअद्भुत संगम है। तो, चलिए जानते हैं इसके 10 रहस्य, जो भक्तों और वैज्ञानिकों दोनों को चकित करते हैं।जगन्नाथ धाम के 10 रहस्य

1. पुरी में हवा समुद्र से आती है, यानी समुद्र से भूमि की ओर बहती है, लेकिन जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर लगा ध्वज हमेशा हवा की दिशा के विपरीत लहराता है। यह प्राकृतिक नियमों के विपरीत है और आज तक रहस्य बना हुआ है।

2. मंदिर के ऊपर स्थित सुदर्शन चक्र किसी भी स्थान से देखने पर हमेशा सामने की ओर दिखाई देता है। यह अद्भुत दृष्टिभ्रम है।

3. मंदिर के सिंहद्वार में प्रवेश करते ही समुद्र की लहरों की आवाज़ सुनाई नहीं देती, जबकि बाहर खड़े होने पर यह आवाज़ स्पष्ट सुनाई देती है।

4. मंदिर का मुख्य शिखर (गर्भगृह) दिन के किसी भी समय छाया नहीं डालता। यह वास्तुकला का अद्भुत चमत्कार है। भोर और संध्या के समय सूर्य की किरणें सीधे जगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार पर गिरती हैं, जो अत्यंत शुभ मानी जाती हैं।

5. मंदिर की रसोई में प्रतिदिन 56 प्रकार का भोग बनता है। चाहे भक्तों की संख्या कितनी भी हो, प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता और न ही अधिक बचता है। पुरी मंदिर की रसोई में 400 से अधिक चूल्हे और सात मिट्टी के बर्तनों की परतें एकसाथ रखी जाती हैं। आश्चर्य यह कि सबसे ऊपर का बर्तन पहले पकता है, नीचे का बाद में!

6. हर 8, 11, 12 या 19 वर्षों में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन की लकड़ी की मूर्तियाँ बदली जाती हैं। इसे नबकलेबारा कहा जाता है। इस प्रक्रिया में नीम के पवित्र पेड़ (दरु ब्रह्म) का चयन गुप्त मंत्रों और ज्योतिषीय गणना से होता है।

7. पुरी मंदिर के आसपास शंख बजाने पर समुद्र की लहरें धीमी हो जाती हैं और मंदिर से दूर जाने पर उनकी आवाज़ तेज हो जाती है। स्थानीय मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ शंखध्वनि सुनते हैं, इसलिए समुद्र भी शांत हो जाता है।

8. प्रतिदिन मंदिर के शिखर पर 45 मंज़िल ऊँचाई पर चढ़कर पुजारी ध्वज बदलते हैं। यह परंपरा सदियों से बिना रुके चल रही है।

9. पुरी में मृत्यु को मोक्षदायी माना जाता है। यहाँ मरणासन्न व्यक्ति को महाप्रसाद खिलाने की परंपरा है, जिससे उसे मुक्ति मिलती है।

10. पुरी में मां विमला देवी को जगन्नाथ धाम की अधिष्ठात्री शक्ति कहा गया है। जगन्नाथ जी को अर्पित भोग तभी महाप्रसाद कहलाता है जब पहले वह मां विमला देवी को अर्पित किया जाए। उनकी पूजा के बिना जगन्नाथ की पूजा अधूरी मानी जाती है

डिसक्लेमर :-
इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सटीकता या विश्वसनीयता की गांरंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संकलित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

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