देहरादून / मुजफ्फरनगर। उत्तराखंड पृथक राज्य स्थापना दिवस के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर पृथक् राज्य उत्तराखंड के आंदोलन में शहीदो की याद में रामपुर तिराहा मुजफ्फरनगर में स्थापित शहीद स्मारक में प्रदेश पूर्व सैनिक विभाग उत्तराखंड द्वारा श्रद्धासुमन श्रद्धांजलि समर्पित की गई। आंदोलन के अमर शहीदों की स्मृति में यह स्थल न केवल उत्तराखंड के गठन की संघर्ष गाथा का साक्षी है, बल्कि उन वीर योद्धाओं की बलिदान गाथा का प्रतीक भी है, जिन्होंने अलग राज्य की मांग को अपनी जान की बाजी लगाकर मजबूत किया। प्रदेश पूर्व सैनिक विभाग उत्तराखंड की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित कर उनकी याद को ताजा किया गया, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
समारोह की शुरुआत शहीद स्मारक पर माल्यार्पण से हुई। प्रदेश पूर्व सैनिक विभाग के अध्यक्ष कर्नल राम रतन नेगी ने सबसे पहले शहीदों को नमन किया, उनके बाद सूबे गोपाल सिंह गाड़िया और उपाध्यक्ष ने पुष्पांजलि समर्पित की। जिला पदाधिकारी रुड़की तथा हरिद्वार से पधारे पदाधिकारियों व सैंकड़ो कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने भी इस श्रद्धासुमन में अपना योगदान दिया। पूर्व सैनिक विभाग के पदाधिकारियों की उपस्थिति ने इस अवसर को अंतरराज्यीय एकता का संदेश दिया, जो शहीदों के सपनों को साकार करने की दिशा में एकजुटता का प्रतीक बना।
कार्यक्रम में राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियां भी शामिल हुईं। राकेश ममता, भगवानपुर विधायक तथा हरिद्वार से विधायक फुरकान अहमद और रवि बहादुर ने शहीद स्मारक पर पहुंचकर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने समारोह को जन-आंदोलन की याद दिलाते हुए और अधिक जीवंत बना दिया। सभी ने दो मिनट का मौन धारण कर शहीदों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की, जिससे वातावरण में गहन भावुकता का संचार हुआ।
उत्तराखंड राज्य आंदोलन: एक संक्षिप्त ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
उत्तराखंड का पृथक राज्य आंदोलन 1990 के दशक में अपने चरम पर पहुंचा था। पहाड़ी क्षेत्रों की उपेक्षा, संसाधनों की कमी और विकास की असमानता ने लोगों को एकजुट किया। रामपुर तिराहा की घटना 2 अक्टूबर 1994 की रात को घटी, जब दिल्ली कूच कर रही रैली पर पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें कई आंदोलनकारी शहीद हो गए। यह बलिदान व्यर्थ नहीं गया – 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड एक अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। रजत जयंती वर्ष में यह श्रद्धांजलि न केवल स्मृति है, बल्कि राज्य के विकास और शहीदों के सपनों को पूरा करने की प्रतिबद्धता भी दर्शाती है।

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