देहरादून में IMA की सुरक्षा से खिलवाड़ पर भाजपा सरकार जवाब दे – गरिमा दसौनी

देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी (IMA )के बेहद संवेदनशील क्षेत्र के पास मॉल एवं रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स के निर्माण को लेकर उठे गंभीर सुरक्षा सवालों पर उत्तराखंड कांग्रेस की नेत्री गरिमा मेहरा दसौनी ने राज्य सरकार और प्रशासन को जमकर घेरा ।
दसौनी ने कहा कि प्रकरण ने एक बार फिर भाजपा सरकार की नीतियों और नीयत दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

दसौनी ने कहा कि कुछ ही महीने पहले धौलास क्षेत्र में लगभग 20 एकड़ भूमि को लेकर भाजपा नेताओं द्वारा जिस प्रकार का राजनीतिक प्रपंच रचा गया, वह किसी से छिपा नहीं है। धौलास, जो IMA से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित है, वहां बन रही महादेव रेजिडेंसी को भाजपा ने जानबूझकर “मुस्लिम यूनिवर्सिटी” बताकर झूठा प्रचार किया, “डेमोग्राफी चेंज” का डर फैलाया और कांग्रेस पर राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने के बेबुनियाद आरोप लगाए। यह सब केवल तुष्टिकरण और समाज को बांटने की राजनीति का हिस्सा था लेकिन आज सच्चाई सामने है।

IMA के अधिकारियों द्वारा स्वयं राज्य प्रशासन और MDDA को लिखे गए पत्रों में स्पष्ट किया गया है कि पंडितवाड़ी क्षेत्र में IMA के बेहद नजदीक प्रस्तावित मॉल और रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स सुरक्षा मानकों का खुला उल्लंघन है। रक्षा मंत्रालय के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार, 100 से 500 मीटर के दायरे में किसी भी निर्माण के लिए स्थानीय सैन्य प्राधिकरण (LMA) से अनुमति अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में बिना NOC के ही परियोजना को मंजूरी दे दी गई।

IMA ने अपने पत्र में साफ कहा है कि यह निर्माण न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि इससे संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। हैरानी की बात यह है कि बार-बार आपत्ति जताने के बावजूद अब तक IMA को न तो कोई संतोषजनक जवाब मिला है और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई है।

यह वही भाजपा है, जिसने 15 किलोमीटर दूर स्थित धौलास में झूठी कहानियां गढ़कर राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया, लेकिन आज जब IMA के ठीक पास वास्तविक सुरक्षा खतरा खड़ा हो रहा है, तब वही भाजपा सरकार चुप्पी साधे बैठी है।गरिमा ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। बिना NOC के दी गई सभी अनुमतियों को तत्काल निरस्त किया जाए।

IMA द्वारा उठाई गई आपत्तियों का तत्काल समाधान किया जाए और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। राष्ट्रीय सुरक्षा कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भाजपा सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि वह सुरक्षा के मुद्दे पर दोहरा मापदंड क्यों अपना रही है।

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